वॉशिंगटन डीसी8 मिनट पहले
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति पुतिन 15 अगस्त को अलास्का में मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच 7 साल बाद हो रही इस मुलाकात का एजेंडा रूस-यूक्रेन जंग रोकना है।
ट्रम्प-पुतिन की मीटिंग अलास्का के सबसे बड़े शहर एंकोरेज में बने अमेरिकी मिलिट्री बेस पर हो रही है। CNN के मुताबिक मीटिंग के दौरान कमरे में ट्रम्प-पुतिन के अलावा सिर्फ दो दुभाषिए होंगे। दोनों के बीच क्या बात होगी इसका ब्यौरा नहीं आएगा। मुलाकात के बाद दोनों नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।
इधर बातचीत से पहले रूस और यूक्रेन के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। पुतिन रूसी कब्जे वाले यूक्रेन के करीब 20% इलाके को रूस में शामिल करना चाहते हैं। वहीं, जेलेंस्की, यूक्रेन की एक इंच भी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं।
यूक्रेन-जंग खत्म होने में दिक्कतें क्या हैं, पुतिन और ट्रम्प अलास्का में ही क्यों मिल रहे हैं, पुतिन की सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं, स्टोरी में जानेंगे…

7 दिन पहले ट्रम्प-पुतिन मुलाकात का प्लान बना
ट्रम्प और पुतिन 2022 से जारी रूस-यूक्रेन जंग को खत्म करने को लेकर बातचीत शुरू करने के लिए मिल रहे हैं। ट्रम्प ने 2023-24 के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान कई मौकों पर वादा किया था कि वे राष्ट्रपति बनने के बाद 24 घंटे के भीतर रूस-यूक्रेन जंग को खत्म करवा देंगे। उनके राष्ट्रपति बने 6 महीने से ज्यादा हो गया लेकिन ट्रम्प का यह वादा अभी तक पूरा नहीं हो सका।
इसके उल्ट रूस ने यूक्रेन पर हवाई हमले और तेज कर दिए। इससे नाराज होकर ट्रम्प ने रूस को पीस डील पर बात करने के लिए 50 दिन का वक्त दिया था। ट्रम्प ने तत्काल युद्धविराम पर सहमति नहीं होने पर और कड़े अमेरिकी प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी। 8 अगस्त को यह डेडलाइन खत्म हो गई।
डेडलाइन से दो दिन पहले 6 अगस्त को अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने मॉस्को में पुतिन से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद ही ट्रम्प और पुतिन के बीच मुलाकात का प्लान बना।
इस मुलाकात के बाद फिलहाल सीजफायर की उम्मीद नहीं है। व्हाइट हाउस ने भी तुरंत सीजफायर से इनकार करते हुए कहा कि इस मीटिंग का मकसद यह समझना है कि यूक्रेन जंग को खत्म करने के रास्ते क्या हो सकते हैं।
ट्रम्प और पुतिन अलास्का में ही क्यों मिल रहे हैं
बीबीसी के मुताबिक ट्रम्प और पुतिन के अलास्का में ही मिलने की सबसे बड़ी वजह सुरक्षा है। अलास्का का सबसे नजदीकी हिस्सा रूस के चुकोटका से सिर्फ 90 किलोमीटर दूर है। पुतिन बिना किसी ‘दुश्मन’ देश के ऊपर से उड़ान भरे वहां पहुंच सकते हैं।
इस क्षेत्र में रूस के कुछ एयरफोर्स बेस और सैन्य निगरानी स्टेशन हैं, जहां परमाणु हथियार भी हो सकते हैं। पुतिन का यहां पर मिलना ज्यादा सुरक्षित होगा।
दूसरी वजह है दूरी। अलास्का यूक्रेन और यूरोप से काफी दूर है। यह पुतिन की उस सोच के मुताबिक है, जिसमें वह कीव और यूरोपीय संघ के नेताओं को बीच में लाए बिना सीधे अमेरिका से बात करना चाहते हैं।
अलास्का में पुतिन के लिए क्या कोई रिस्क है, एक्सपर्ट से जाने
यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की पहल पर हो रही है, मुझे नहीं लगता कि अमेरिका अलास्का में पुतिन की सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम उठाएगा। यह न केवल अमेरिका-रूस संबंधों के भविष्य के लिए, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए भी खतरनाक हो सकता है।
रूस ने अमेरिकी धरती पर बैठक के लिए सहमत होने से पहले पुतिन की सुरक्षा की गारंटी मांगी होगी। पुतिन अलास्का में अमेरिकी जाल में फंस जाए वो इतने बेवकूफ नहीं हैं।
पुतिन का EU या किसी और ज्यादा सुरक्षित जगह के बजाए अमेरिका जाने के लिए तैयार होना उसके अमेरिका के साथ संबंध सुधारने के प्रयास के तौर पर भी देखा जा सकता है।

अलास्का में पुतिन के लिए सुरक्षा के क्या इंतजाम
पुतिन और ट्रम्प अलास्का के सबसे बड़े शहर एंकोरेज में मिलेंगे। यहां पर एल्मेंडॉर्फ-रिचर्डसन सैन्य अड्डा है जहां उनकी मीटिंग होगी। सुरक्षा के नजरिए से यह सैन्य अड्डा बेहद सुरक्षित माना जाता है। ये अलास्का का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना है।
अलास्का न्यूज के मुताबिक पुतिन बेरिंग स्ट्रेट के रास्ते अलास्का जाएंगे। वे रूसी एयरस्पेस से सीधे US हवाई क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। अलास्का में पुतिन की सुरक्षा की जिम्मेदारी रुसी सैनिक करेंगे। पुतिन को सुरक्षित ले जाने और लाने के लिए रुसी सुरक्षाकर्मियों ने स्पेशल प्लान तैयार किया है।
पुतिन के दौरे को लेकर एंकोरेज में 15 अगस्त को सभी उड़ानें बंद हैं। पुतिन के विमान को विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत लाया जाएगा। चप्पे-चप्पे पर सीक्रेट सर्विस की नजर होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं की मीटिंग गिर्डवुड के एलिस्का रिसॉर्ट में भी हो सकती है। यहां गुरुवार और शुक्रवार के लिए होटल को ब्लैकआउट किया गया है, जिससे ये अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। यह जगह एंकोरेज से 64 किमी दूर है।
पुतिन यूक्रेन का 20% हिस्सा छोड़ने को तैयार नहीं
रूस ने यूक्रेन के करीब 20% हिस्से, यानी लगभग 1 लाख 14 हजार 500 वर्ग किलोमीटर पर कब्जा कर रखा है। इसमें क्रीमिया, डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन, और जापोरिजिया जैसे क्षेत्र शामिल हैं। रूस इन क्षेत्रों को अपनी सामरिक और ऐतिहासिक धरोहर मानता है और इन्हें छोड़ने को तैयार नहीं है।
पुतिन साफ कह चुके हैं कि यूक्रेन से शांति को लेकर बातचीत तभी हो सकती है जब यूक्रेन, रूस के कब्जाए गए क्षेत्रों से अपना दावा छोड़े और उन इलाकों को रूस के हिस्से के रूप में स्वीकारे। इसके अलावा पुतिन की यह शर्त भी है कि यूक्रेन नाटो में शामिल होने की अपनी मंशा छोड़ दे।

जेलेंस्की यूक्रेन की एक इंच जमीन देने को राजी नहीं
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की यूक्रेन की एक इंच जमीन भी रूस को नहीं देंगे। उनका मानना है कि अगर यूक्रेन अभी पीछे हटता है तो इससे देश की संप्रभुता और सुरक्षा कमजोर हो सकती है। साथ ही रूस को भविष्य में और ज्यादा हमले करने का मौका मिल सकता है।
ट्रम्प ने 13 अगस्त को यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं के साथ वर्चुअल मीटिंग की। इस मीटिंग में ट्रम्प ने जंग खत्म करने के लिए जमीन अदला-बदली की बात कही।
जेलेंस्की ने बिना किसी शर्त के युद्धविराम की मांग की। जेलेंस्की ने कहा कि रूस को किसी भी हाल में यूक्रेन का दूसरा बंटवारा नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने ट्रम्प से युद्धविराम और सुरक्षा गारंटी देने की बात कही।
यूरोपीय देश भी यूक्रेन के सरेंडर करने के पक्ष में नहीं
यूरोपीय देश, खासकर जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस, यूक्रेन के आत्मसमर्पण के पक्ष में नहीं हैं। वे रूस की शर्तों को अस्वीकार्य मानते हैं और यूक्रेन की संप्रभुता का समर्थन करते हैं। यूरोपीय देशों का मानना है कि बिना यूक्रेन को शामिल किए या सुरक्षा गारंटी दिए कोई समझौता करना गलत होगा। इससे शांति वार्ता में सहमति बनाना मुश्किल हो रहा है।
जर्मनी चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने बुधवार को ट्रम्प के साथ हुई वर्चुअल बैठक के दौरान यूक्रेनी सुरक्षा हितों को ध्यान में रख कर पुतिन से बातचीत करने को कहा है। वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यूक्रेन में किसी भी क्षेत्रीय आदान-प्रदान पर केवल यूक्रेन के साथ ही चर्चा की जानी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, “हमें यूक्रेन का समर्थन जारी रखना चाहिए, और जब मैं ‘हम’ कहता हूं, तो मेरा मतलब यूरोपीयन और अमेरिकन दोनों से हैं।” ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के प्रवक्ता ने वर्चुअल मीटिंग के बाद कहा कि यूक्रेन को किसी भी शांति समझौते के तहत विश्वसनीय सुरक्षा गारंटी मिलनी चाहिए।

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