Husband and brother-in-law, who were jailed for dowry harassment, released from Varanasi court | वाराणसी कोर्ट से दहेज उत्पीड़न में जेल गए पति-देवर रिहा: 29 साल पहले शादी फिर 1999 में दर्ज कराया केस, आरोपों पर नहीं मिला कोई साक्ष्य – Varanasi News

Actionpunjab
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वाराणसी पुलिस में दहेज और वस्तुएं मांगने का आरोप लगाकर पुलिस में केस दर्ज कराने वाली महिला को झटका लगा है। 26 साल पहले विवाहिता को मारने-पीटने व प्रताड़ित करने में दर्ज किए गए केस में आरोपी पति व देवर कोर्ट से कोर्ट ने राहत मिल गई, हालांकि केस दर्ज ह

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अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन, तृतीय) अजय प्रताप की अदालत ने जंगमबाडी, दशाश्वमेध निवासी पति सूरज प्रसाद यादव व देवर संतोष कुमार यादव को आरोप सिद्ध न होने पर संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव गुड्डू, नरेश यादव व संदीप यादव ने पक्ष रखा।

अभियोजन ने बताया कि वादी सीताराम यादव ने 13 मई 1999 को दशाश्वमेध थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि उसकी लड़की सोनी की शादी 16 फरवरी 1996 को सूरज प्रसाद यादव के साथ हुई थी। शादी के बाद जब उसकी पुत्री विदा होकर ससुराल पहुंची, तब पति सूरज, देवर संतोष व ससुर मोती लाल यादव दहेज में रंगीन टीवी व स्कूटर की मांग को लेकर आए दिन मारने-पीटने व प्रताड़ित करने लगे।

इस बीच वर्ष 1998 में उसकी लड़की को एक पुत्री पैदा हुई तो वह लोग बेटी संग उसकी पुत्री को मारपीट कर घर से निकाल दिया। किसी तरह समझा बुझाकर पुनः उसने अपनी पुत्री को उसके ससुराल पहुंचाया। लेकिन कुछ दिनों बाद ही उसकी पुत्री मायके आई और बताया कि दहेज की मांग को लेकर सास ससुर और देवर से काफी मारे पीते और जलाने जा रहे थे, लेकिन किसी तरफ वह भागकर घर आई है।

परिजनों का आरोप था कि बेटी को ससुरालीजनों के साथ सामंजस्य बनाने और मामले के निस्तारण का प्रयास किया गया लेकिन ससुराल वाले दहेज की मांग को लेकर अड़े रहे। मामले में विचरण के दौरान पत्रावली व साक्ष्यों के अवलोकन के 26 साल बाद पति व देवर को दोषमुक्त कर दिया। ससुर मोती लाल यादव की मृत्यु हो जाने के कारण सुनवाई समाप्त कर दी, बाकी सभी रिहा हो गए।

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