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फतेहाबाद जिले के टोहाना के गांव डांगरा निवासी मनीष पूनिया ने थारपारकर नस्ल की अपनी 11 महीने की बछिया को 1 लाख 81 हजार रुपए में बेचा है। लोगों का दावा है कि इतनी कीमत में बिकने वाली ये पहली बछिया है। इस बछिया को गोलू खरकड़ा ने खरीदा है।
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मनीष पूनिया ने बताया कि वे मुख्य रूप से गायों का व्यापार नहीं करते हैं। उन्होंने बाड़े में जगह की कमी के कारण बछिया को बेचने का निर्णय लिया। इस अवसर पर गांव मादुआना के निवासी जिले सिंह बराला भी मौजूद थे, जिन्होंने थारपारकर नस्ल की गायों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मनीष पूनिया और गोलू खरकड़ा दोनों ही गौ-पालक हैं।
जिले सिंह के अनुसार, थारपारकर नस्ल की गायें प्रतिदिन लगभग 18 से 20 किलोग्राम दूध देती हैं, जो अत्यधिक गुणकारी होता है। यह नस्ल शांत स्वभाव की होती है और आसानी से घर के माहौल में घुल-मिल जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि ये गायें काफी समझदार होती हैं और अपना भोजन लेने के लिए रसोई तक पहुँच जाती हैं। जिले सिंह ने बताया कि उनके पास भी इसी नस्ल की गाय और बछिया हैं, जिनसे उन्हें बहुत लगाव है।