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जालोर सीएमएचओ द्वारा जैम टेंडर में बरती गई अनियमितता की जानकारी विभाग को पहले ही दी जा चुकी थी। लेकिन विभाग ने इसे अनदेखा किया और नतीजतन टेंडर के जरिए सरकारी खजाने को करीब 1 करोड़ रुपए की चपत लगी। जालोर सीएमएचओ भैराराम जाणी ने ना केवल नियमों का उल्लंघन किया, बल्कि जैम पोर्टल की दरों को दरकिनार भी किया।
बता दें कि सीएमएचओ जाणी ने इस टेंडर के लिए फरवरी में जालोर व सांचौर जिला अस्पताल के साथ-साथ जिले की सीएचसी व पीएचसी से लैब से संबंधित सामान की डिमांड मांगी थी। इसके बाद सीएमएचओ ने सामान खरीद करने से पूर्व टेंडर में स्पेसिफिकेशन तय करने के लिए एक कमेटी बनाई, जिसमें उन्होंने ना केवल अपने करीबी अफसर-कार्मिकों को शामिल किया, बल्कि अयोग्य कार्मिकों को भी शामिल कर लिया। कमेटी में सांचौर के बीसीएमओ डॉ. ओमप्रकाश सुथार, लैब सहायक अर्जुनराम और लैब टेक्नीशियन रणछोड़ाराम को शामिल किया। इनमें से लैब असिस्टेंट को उन्होंने सीनियर लैब टेक्नीशियन बताकर कमेटी में शामिल किया। लैब से जुड़े दोनों ही कार्मिक कमेटी निर्धारण तक प्रोबेशन पीरियड में थे। जबकि नियमानुसार किसी सीनियर व अनुभवी कार्मिकों को कमेटी में शामिल कर स्पेसिफिकेशन तय कराए जाते हैं। जालोर व सांचौर के जिला अस्पतालों में पिछले पांच सालों से लैब रीजेंट्स और कन्ज्यूमेबल आइटम्स की खरीद पीएमओ स्तर पर की जाती रही है। लेकिन इस बार सीएमएचओ जाणी ने वहां से भी डिमांड मांगी। जबकि जिला अस्पतालों में सीधे तौर पर सीएमएचओ को खरीद करने का अधिकार नहीं है। सीएमएचओ कार्यालय सिर्फ बजट उपलब्ध करवाता है।
हालांकि जालोर जिला अस्पताल से डिमांड नहीं भेजी गई। वहीं सांचौर जिला अस्पताल से तत्कालीन पीएमओ भंवरलाल जाणी ने डिमांड भेजी थी। एनएचएम निदेशक को जानकारी दे दी थी : इस टेंडर में सीएमएचओ द्वारा अनियमितता बरतने की जानकारी एनएचएम मिशन के निदेशक को अप्रैल माह में दी जा चुकी थी। तब तक टेंडर के जरिए खरीद होने वाला सामान प्राप्त ही नहीं हुआ था। विभाग को लिखा गया कि सीएमएचओ जाणी ने समिति में जानबूझकर सीमित और कम योग्यता वाले सदस्यों को शामिल किया, ताकि निविदा में मनचाहे स्पेसिफिकेशन तय कर चहेती फर्म को लाभ दिया जा सके। इसके अलावा जालोर व सांचौर जिला अस्पतालों की खरीद भी नियम विरुद्ध किए जाने की जानकारी भी निदेशक को दी गई थी। ^मैं तो लैब असिस्टेंट हूं। मुझे एसएलटी लिखा, शायद मिसप्रिंट हो गया होगा। मैं उस कमेटी में सीएमएचओ के आदेश पर गया था। वहां बाकी सब लोगों ने जो किया उसे देखा। पैथॉलोजिस्ट ने किट वगैरह जांचे, उसे हमने भी देखा।
– अर्जुनराम, लैब असिस्टेंट, सांचौर
^अभी तक तो पीएमओ स्तर पर टेंडर होने के बाद खरीद की जाती रही है, लेकिन इस बार डिमांड मांगी गई थी। हमारे यहां से कोई डिमांड नहीं भेजी गई, इसलिए सप्लाई नहीं मिली।
– वीपी मीणा, पीएमओ, जालोर
^ हमसे डिमांड मांगी थी। हमने भेज दी थी, लेकिन सप्लाई मिली या नहीं मिली से पता करके बताता हूं। – भंवरलाल जाणी, पीएमओ, सांचौर ^कमेटी में जिस अर्जुन को एसएलटी बताया गया है, वह लैब एसिस्टेंट है। उसे एसएलटी कैसे लिखा, इसकी जानकारी नहीं है। दूसरा जो कार्मिक है, वो भीनमाल ब्लॉक का है, वह किस पोस्ट पर है मुझे जानकारी नहीं। हमारा काम खरीदे जा रहे उत्पादों की गुणवत्ता की जांच व निर्धारण करना था। वो हमने किया, लेकिन बाद में कैसा सामान खरीदा गया है, उसकी हमें जानकारी नहीं है।
– ओमप्रकाश सुथार, कमेटी सदस्य व बीसीएमओ सांचौर