Justice Surya Kant reached the silver jubilee celebrations of Jharkhand High Court. | ​​​​​​​झारखंड हाईकोर्ट के सिल्वर जुबली समारोह में पहुंचे न्यायमूर्ति सूर्यकांत: कहा-उच्च न्यायालयों को अस्पतालों के इमरजेंसी वार्डों की तरह त्वरित और सटीक प्रतिक्रिया देनी चाहिए – Ranchi News

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सुप्रीम कोर्ट के होने वाले चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि हाई कोर्ट को ऐसे संस्थानों के रूप में विकसित होना चाहिए जो अन्याय का अस्पताल के एमरजेंसी वार्ड की तरह तुरंत और कुशलता से जवाब दें।

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रांची में झारखंड हाईकोर्ट के सिल्वर जुबली समारोह में बोलते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इस बात पर जोर दिया कि अदालतों को संकट के समय तुरंत, सटीक और समन्वित राहत प्रदान करने के लिए सुसज्जित होना चाहिए।

‘एक इमरजेंसी वार्ड देरी बर्दाश्त नहीं कर सकता’

उन्होंने कहा- “मेरा मानना ​​है कि उच्च न्यायालयों को अपने संस्थागत विकास की कल्पना उसी तरह करनी चाहिए, जैसे एक मॉर्डन हॉस्पिटल अपनी एमरजेंसी सेवाओं को डिजाइन करता है। ऐसी संरचनाओं के साथ जो संकट के समय तुरंत, निर्णायक और सटीक प्रतिक्रिया देने में सक्षम हों। जिस तरह एक एमरजेंसी वार्ड देरी बर्दाश्त नहीं कर सकता, उसी तरह हमारे न्यायालयों को भी उसी स्तर की तैयारी, दक्षता और समन्वित प्रतिक्रिया की आकांक्षा रखनी चाहिए।

इसका अर्थ है तकनीकी क्षमता को मजबूत करना, प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना, विशिष्ट विशेषज्ञता का निर्माण करना और यह सुनिश्चित करना कि न्यायिक प्रक्रियाएं उभरती परिस्थितियों के अनुसार तुरंत अनुकूलित हो सकें। केवल ऐसी दूरदर्शिता से ही न्यायपालिका समय पर और प्रभावी समाधान प्रदान करती रहेगी और हर चुनौती का उस गति और स्पष्टता के साथ सामना करेगी, जिसकी एक संवैधानिक लोकतंत्र मांग करता है। ये केवल प्रशासनिक विचार नहीं हैं, ये न्याय तक पहुंच के विकास में अगला कदम हैं।

हाईकोर्ट भवन सहित पूरे परिसर को रंगीन लाइट से सजाया गया है।

हाईकोर्ट भवन सहित पूरे परिसर को रंगीन लाइट से सजाया गया है।

उच्च न्यायालय नागरिकों और संविधान के बीच सेतु का काम करते हैं

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि संविधान ने न्याय प्रदान करने की एक ऐसी प्रणाली बनाई है, जो तीन स्तंभों पर आधारित है। इनमें से प्रत्येक का एक विशिष्ट लेकिन पूरक उद्देश्य है। जिला न्यायालय रोजमर्रा की शिकायतों का जमीनी स्तर पर समाधान करते हैं और व्यवस्था में जनता का विश्वास बढ़ाते हैं। सर्वोच्च न्यायालय संवैधानिक सीमाओं के अंतिम राष्ट्रीय संरक्षक के रूप में कार्य करता है।

उन्होंने कहा कि इन दोनों के बीच उच्च न्यायालय स्थित हैं, जो नागरिकों और संविधान के बीच सेतु का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत उनकी शक्तियां अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से भी व्यापक हैं। क्योंकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य सभी कानूनी अधिकारों की भी रक्षा कर सकते हैं। यह व्यापक अधिकार, उनकी सुलभता के साथ मिलकर, उच्च न्यायालयों को यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक बनाता है कि सुरक्षा और निवारण दूर या विलंबित न हों।

तकनीकी सुधार पर दिए जा रहे जोर की सराहना

झारखंड उच्च न्यायालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने इसकी पच्चीस वर्षों की यात्रा को लचीलेपन, नवाचार और संवैधानिक मूल्यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता से परिपूर्ण बताया। उन्होंने आदिवासी अधिकारों, श्रमिकों के सम्मान, पर्यावरणीय संसाधनों और खनिज निष्कर्षण में अंतर-पीढ़ीगत समता के सिद्धांतों की रक्षा करने वाले न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों पर प्रकाश डाला। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने उच्च न्यायालय द्वारा तकनीकी सुधार पर दिए जा रहे जोर की सराहना करते हुए इसे न्याय तक पहुंच में सुधार के लिए जरूरी बताया।

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