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- Motivational Story Of Swami Vivekanadn, Inspirational Story In Hindi, Inspirational Story: A Young Man Asked Vivekananda How To Find Peace?
10 घंटे पहले
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स्वामी विवेकानंद से जुड़ा किस्सा है। एक दिन विवेकानंद जी के पास एक युवक पहुंचा। उसके चेहरे पर थकान, भ्रम और आंखों में बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी। उसने स्वामी जी से कहा कि मैं कई साधु-संतों से मिल चुका हूं। बड़े-बड़े मंदिरों, आश्रमों में गया हूं, लेकिन जो मैं चाहता हूं, वह मुझे आज तक नहीं मिला।
स्वामी जी ने उससे पूछा कि तुम चाहते क्या हो?
युवक बोला कि मैं शांति चाहता हूं। शांति के लिए बहुत प्रयास किए, लेकिन जितना प्रयास करता हूं, उतना अधिक अशांत हो जाता हूं। क्या आप कोई समाधान बता सकते हैं?
स्वामी जी ने पूछा कि अब तक क्या-क्या प्रयास किए हैं?
युवक ने लंबी सूची गिना दी- सत्संग सुना, हनुमान जी की भक्ति की; मन को शांत करने के लिए ध्यान-योग किया; फिर एक संत ने कहा कि शास्त्रों का अध्ययन करो, तो एकांत कमरे में घंटों, दिनों-रात तनाव के साथ मोटे-मोटे शास्त्र पढ़ने लगा। खुद को लोगों से बिल्कुल अलग कर लिया था, लेकिन परिणाम वही रहा अशांति।
स्वामी विवेकानंद बोले कि सबसे पहले एक काम करो। अपने उस एकांत कमरे के सारे दरवाजे खोल दो। फिर अपने घर के भी दरवाजे खोलो और बाहर निकलो। बाहर जाकर उन लोगों को देखो जो दुखी हैं, गरीब हैं, बीमार हैं और अपनी परिस्थितियों से लाचार हैं। ऐसे लोग तुम्हें मंदिरों या आश्रमों में नहीं, बल्कि बाहर ही मिलेंगे। उनकी सेवा करो। यदि धन से सेवा नहीं कर सकते तो तन से करो- किसी भूखे को भोजन दो, किसी अनपढ़ बच्चे को पढ़ाओ, किसी दुखी व्यक्ति का मन हल्का कर दो। ये एक महीना करो और फिर मेरे पास आना।
युवक स्वामी जी की बात सुनकर वहां से लौट गया और इसके बाद उसने वैसा ही किया, जैसा स्वामी जी ने कहा था। उसने पहली बार दूसरों के दुखों को नजदीक से देखा। किसी को दवा पहुंचाई, किसी को खाना खिलाया, किसी के बच्चों की पढ़ाई में मदद की। धीरे-धीरे उसके भीतर ऐसी शांति आने लगी, जो किसी ध्यान, किसी शास्त्र से नहीं मिली थी।
एक महीने बाद वह स्वामी जी के पास लौटा। उसने कहा कि सेवा ने मेरे भीतर का शून्य भर दिया। मैं अब खुद को हल्का और संतुष्ट महसूस करता हूं।
स्वामी जी बोले कि अब तुम ध्यान भी करो, शास्त्र भी पढ़ो, लेकिन सेवा को जीवन का हिस्सा बना लो। मानव सेवा ही सच्ची शांति देती है।
प्रेरक प्रसंग की सीख
- समस्या से ध्यान हटाकर सेवा कार्य करो
अक्सर हम अपनी चिंताओं में इतने उलझ जाते हैं कि मन और भारी हो जाता है। जब हम दूसरों की सेवा करते हैं, हमारा ध्यान समस्याओं से हटकर समाधान पर आ जाता है। ये मानसिक संतुलन देता है।
- सेवा आत्म विकास का सबसे सरल मार्ग है
सेवा करते हुए व्यक्ति के भीतर सहानुभूति, धैर्य, विनम्रता और कृतज्ञता जैसे गुण विकसित होते हैं, जो किसी भी लाइफ मैनेजमेंट सिस्टम का मजबूत आधार हैं।
- ज्ञान तभी उपयोगी है जब कर्म से जुड़ा हो
केवल किताबें पढ़ना, प्रवचन सुनना या ध्यान लगाना तब तक पूर्ण नहीं होता, जब तक हम उन्हें जीवन में लागू न करें। सेवा ज्ञान को कर्म में बदलती है।
- भावनाओं को संतुलित रखें
जब हम दूसरों की मदद करते हैं, हमारा मन कमी के बजाय योगदान की भावना पर ध्यान देता है। ये भावनात्मक संतुलन तनाव कम करता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है।
- छोटे काम भी बड़े परिणाम देते हैं
किसी को मुस्कान देना, किसी की बात ध्यान से सुनना, किसी असहाय को थोड़ा सा समय देना, ये छोटे-छोटे कार्य भी मन को अत्यधिक शांति और संतोष देते हैं। ऐसे छोटे-छोटे काम भी बड़े लाभ देते हैं।
- मिल-बांटकर जीने से मन हल्का होता है
उत्सव, त्योहार या खुशी का समय सिर्फ अपने आनंद के लिए नहीं होता। जब हम अपनी खुशी दूसरों के साथ बांटते हैं, तो हमारा आनंद कई गुना बढ़ जाता है और नकारात्मक भाव दूर हो जाते हैं।
- दैनिक जीवन में सेवा को एक आदत बनाएं
रोज एक छोटा सा सेवा कार्य भी आपके मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सकारात्मकता को लगातार बढ़ा जाता है। इसलिए दैनिक जीवन में दूसरों की छोटी-छोटी सेवा करने की आदत डालें।