Somy Ali and Madhur Bhandarkar break down remembering Dharmendra | धर्मेंद्र को याद कर सोमी अली, मधुर भंडारकर रो पड़े: एक्ट्रेस बोलीं- मुझे प्यार से मुमताज बुलाते थे, मेरे पिता समान थे

Actionpunjab
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35 मिनट पहलेलेखक: वर्षा राय

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भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के महान अभिनेता धर्मेंद्र जी के निधन को एक सप्ताह बीत चुके है। लेकिन उन्हें भुलाना अभी भी संभव नहीं है। हर तरफ उनकी कमी खल रही है। फिल्म जगत से लेकर लाखों प्रशंसकों तक, सभी के दिलों में उनके जाने का दर्द अभी भी ताजा है। उनके साथ काम कर चुकीं अभिनेत्री सोमी अली और निर्देशक मधुर भंडारकर आज दैनिक भास्कर से बातचीत में, धर्मेंद्र जी के साथ बिताए अपने शुरुआती दिनों से लेकर आखिरी पलों तक पर बाती की।

आपने जब धर्मेंद्र जी के बारे में सुना तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?

सोमी अली- यह खबर सुनकर मुझे बहुत ज्यादा तकलीफ हुई। धर्मेंद्र जी मेरे पिता समान थे। मुझे इंडस्ट्री में लाने वाले भी धर्मेंद्र जी ही थे। वह मुझे अपने बेटे बॉबी के साथ फिल्मों में लॉन्च करने वाले थे, जिसके लिए स्क्रीन टेस्ट भी हुआ था। उन्होंने मुझे अपने घर भी बुलाया था और हमने काफी वक्त साथ बिताया था। वह मुझे प्यार से मुम्मू यानी मुमताज बुलाते थे। वह कहते कि मेरी नाक बिल्कुल मुमताज जैसी लगती है।कुछ दिन पहले ही उनकी तबीयत खराब होने की खबर मिली थी, लेकिन बाद में वह हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर घर आ गए थे। अब विश्वास नहीं हो रहा है कि वो हमारे बीच नहीं हैं। वह मुझे अपनी बेटी की तरह समझते थे और कहते थे “बेटा, अगर कोई परेशानी हो या कोई तंग करे, तो तुरंत मेरे पास आ जाना।”

मधुर भंडारकर- मुझे यह खबर सुनकर बड़ा अफसोस हुआ है। धर्मेंद्र जी से मेरी मुलाकात अक्सर किसी न किसी फंक्शन या इवेंट में हो जाया करती थी। वह जीवन से भरपूर इंसान थे। धर्मेंद्र जी की एनर्जी कमाल की थी। हर किरदार चाहे वह एक्शन हो, कॉमेडी हो हर तरह के रोल वह बखूबी निभा लेते थे। उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता। आने वाली जनरेशन उन्हें हमेशा याद रखेगी। सोशल मीडिया पर भी वह काफी एक्टिव रहा करते थे।

क्या आप अपने और धर्मेंद्र जी के उस आखिरी मोमेंट के बारे में बता सकती हैं चाहे वह किसी फिल्म के सेट की आखिरी याद ही क्यों न हो?

सोमी अली- हमारी आखिरी मुलाकात फिल्म माफिया के सेट पर हुई थी। हम महाबलेश्वर में शूट कर रहे थे। फिल्म में मैं एक पुलिस ऑफिसर का किरदार निभा रही थी और धर्मेंद्र जी एक विजिलांटे का, जिन्हें मुझे गिरफ्तार करना था। सीन की शूटिंग के दौरान मैंने मजाक में कहा, “धर्मेंद्र जी, मैं आपको अरेस्ट नहीं कर सकती हूं।” तो उनका जवाब आया, “तू कर लेगी, तू कुछ भी कर सकती है।” उस सीन के बाद उन्होंने मुझे गले लगाया। मैंने उनके पैर छुए। फिल्म के रैप-अप के समय उनके जो आखिरी अल्फाज मेरे लिए थे कि “मैं तुम्हारा डैडी हूं। तुम्हें कभी कोई मुसीबत आए तो मेरे पास आना।” मैंने उनका आशीर्वाद लिया और वहां से चली गई।

आपके और धर्मेंद्र जी के बीच कोई चीज कॉमन थी? जैसे दोनों को ऑन-स्क्रीन डांस करना पसंद नहीं था और दोनों शर्मीले थे।

सोमी अली- जी, हमारे बीच दो कॉमन बातें थीं। मैंने उनसे कहा था कि मैंने बचपन से ही कभी डांस नहीं किया है और मुझे डांस करना नहीं आता। तब धर्मेंद्र जी ने कहा, “बेटा, मुझे भी नहीं आता।” और यह सुनकर हम दोनों बहुत हंसे थे। दूसरी बात यह कि धर्मेंद्र जी और मैं दोनों अपने डायलॉग हिंदी में नहीं, बल्कि उर्दू में लिखा करते थे। हमने एक-दूसरे का नाम भी उर्दू में लिखकर एक-दूसरे को दिया था।

धर्मेंद्र जी ने अपने करियर में 300 से ज्यादा फिल्में की हैं। उनकी कोई ऐसी फिल्म जो आपके दिल के सबसे करीब हो?

सोमी अली- जी, धर्मेंद्र जी की मेरी सबसे पसंदीदा फिल्म खामोशी है। मैंने खुद साइकोलॉजी में मास्टर्स किया था, इसलिए मैं उस फिल्म से सबसे ज्यादा रिलेट कर पाती थी। साथ ही, मुझे हर एक्ट्रेस के साथ उनकी ऑन-स्क्रीन जोड़ी बेहद खूबसूरत लगती थी चाहे वह जीनत हों या शोले में हेमा मालिनी। शोले में धर्मेंद्र जी की कॉमेडी टाइमिंग काबिल-ए-तारीफ है।

नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए धर्मेंद्र जी की विरासत के बारे में कुछ कहना चाहेंगी?

सोमी अली- मैं बस यही कहूंगी कि धर्मेंद्र जी जैसा इंसान इंडस्ट्री में कोई नहीं था। वह बेहद नेक और साफ-दिल के इंसान थे। वह इतनी जल्दी हमें छोड़कर चले जाएंगे, यह मैंने कभी सोचा भी नहीं था।

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