सचिन प्रजापति | प्रयागराज5 मिनट पहले
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प्रयागराज में शिक्षकों के शैक्षिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। “NCF के मूल्यों और NEP की दृष्टि के साथ भविष्य-तैयार शिक्षार्थियों का निर्माण” विषय पर आधारित यह कार्यशाला 13 दिसंबर को होटल ग्रैंड कॉन्टिनेंटल, सिविल लाइंस में संपन्न हुई। इस दौरान आसान डिजिटल, NCF और NEP की नई शिक्षा पद्धति पर आधारित पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
यह आयोजन न्यू सरस्वती हाउस (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया था। इसमें प्रयागराज के लगभग 80 विद्यालयों से 100 शिक्षक, शिक्षिकाएं और प्राचार्य शामिल हुए।
कार्यक्रम के आयोजक प्रशांत कुमार ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा (NCF) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप शिक्षण के लिए तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है, ताकि वे पुस्तकों के ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक, रचनात्मक और आलोचनात्मक सोच भी विकसित कर सकें।
कार्यशाला का आरंभ पंजीकरण प्रक्रिया से हुआ। पहले सत्र में NCF और NEP के प्रमुख बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि नई शिक्षा नीति कौशल विकास, अनुभवात्मक अधिगम और जीवन मूल्यों पर विशेष बल देती है।
दूसरे सत्र में शिक्षार्थी-केंद्रित वातावरण के निर्माण पर चर्चा हुई। इसमें विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के सरल उपाय साझा किए गए।
चाय अवकाश के बाद नवाचारी शिक्षण पद्धतियों पर आधारित सत्र आयोजित किया गया। इसमें गतिविधि आधारित शिक्षण, डिजिटल संसाधनों के उपयोग और आधुनिक कक्षा शिक्षण तकनीकों पर प्रकाश डाला गया।
इसके बाद मूल्यांकन रणनीतियों पर केंद्रित सत्र में सतत एवं समग्र मूल्यांकन की उपयोगिता समझाई गई। कार्यशाला के अंतिम सत्र में शैक्षिक परिवर्तन के लिए नेतृत्व की भूमिका पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें शिक्षकों की नेतृत्व क्षमता, टीम वर्क और सकारात्मक शैक्षणिक संस्कृति के महत्व पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. रणवीर सिंह चौहान और अनुरिमा रॉय थीं। कार्यक्रम का संचालन और व्यवस्थापन शिवम मिश्रा, प्रशांत सिंह एवं वेद चौबे ने किया।

