PM Modi to visit Jordan, meet King Abdullah II | जॉर्डन किंग से मिलने प्रोटोकॉल तोड़कर एयरपोर्ट गए थे मोदी: 7 साल बाद PM उनके मेहमान; भारत यहां से 40% खाद खरीदता

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नई दिल्ली/अम्मान27 मिनट पहले

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की त्रिपक्षीय यात्रा पर रवाना होंगे। अपनी यात्रा के पहले चरण में मोदी जॉर्डन किंग अब्दुल्ला के निमंत्रण पर वहां जा रहे हैं। - Dainik Bhaskar

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की त्रिपक्षीय यात्रा पर रवाना होंगे। अपनी यात्रा के पहले चरण में मोदी जॉर्डन किंग अब्दुल्ला के निमंत्रण पर वहां जा रहे हैं।

तारीख- 10 फरवरी 2018

जगह- जॉर्डन

पीएम मोदी फिलिस्तीन की ऐतिहासिक यात्रा पर जा रहे थे। उस समय भारत से फिलिस्तीन जाने की कोई सीधी उड़ान नहीं थी। इसी वजह से मोदी का विमान जॉर्डन की राजधानी अम्मान में उतरा।

यह यात्रा केवल 2 घंटे की ट्रांजिट विजिट थी। आमतौर पर ऐसे स्टॉप पर सिर्फ औपचारिक अधिकारी मिलते हैं, लेकिन इतने कम समय के बावजूद जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला मोदी से मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं की मुलाकात एयरपोर्ट के पास ही हुई।

इस छोटी सी मुलाकात के करीब 15 दिन बाद जॉर्डन किंग अब्दुल्ला भारत दौरे पर पहुंचे। उनके आने पर मोदी प्रोटोकॉल तोड़कर एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचे थे।

अब 7 साल बाद एक बार फिर मोदी जॉर्डन जा रहे हैं। स्टोरी में जानिए मोदी का यह दौरा खास क्यों है…

भारत-जॉर्डन रिश्ते के 75 साल पूरे

भारत और जॉर्डन ने 1950 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे, जिसके 2025 में 75 साल पूरे हो गए हैं। मोदी इसी मौके पर जॉर्डन जा रहे हैं।

भारत, जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। दोनों देशों के बीच 2023-24 में 26,033 करोड़ रुपए का व्यापार हुआ। इसमें भारत का निर्यात करीब 13,266 करोड़ रुपए था। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर यानी 45,275 करोड़ करने का लक्ष्य रखा है।

भारत, जॉर्डन से बड़ी मात्रा में रॉक फॉस्फेट और फर्टीलाइजर का कच्चा माल खरीदता है। दूसरी तरफ जॉर्डन भारत से मशीनरी, पेट्रोलियम, अनाज, रसायन, मीट, ऑटो पार्ट्स और उद्योगों से जुड़े उत्पादों का आयात करता है। भारतीय कंपनियों ने जॉर्डन के फॉस्फेट और टेक्सटाइल सेक्टर में 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है।

IMEC कॉरिडोर पर भी चर्चा संभव

भारत में साल 2023 में G20 समिट के दौरान पहली बार इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) का ऐलान हुआ। यह एक इंटरनेशनल ट्रेड रूट का प्लान है, जिसके जरिए भारत का सामान मिडिल ईस्ट से होते हुए यूरोप तक पहुंचाया जाएगा।

IMEC को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का विकल्प बताया जा रहा है। BRI भी एक इंटरनेशनल रूट है जिसमें एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ने का प्लान है। इसकी शुरुआत 2013 में हो चुकी है।

IMEC के ऐलान के करीब 1 महीने बाद 7 अक्टूबर को हमास ने इजराइल पर हमला शुरू कर दिया। इससे IMEC के भविष्य पर सवाल उठाए जाने लगे। 2 साल बाद गाजा जंग के रुकते ही एक बार फिर ये कॉरिडोर चर्चा में आ गया है।

जॉर्डन और इजराइल में काम बाकी

IMEC कॉरिडोर में भारत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, जॉर्डन, इजराइल, ग्रीस, इटली, फ्रांस, अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और जर्मनी शामिल हैं। इसका मकसद यूरोप, मिडिल ईस्ट और भारत के बीच व्यापार को बढ़ाने के लिए एक ट्रेड रूट तैयार करना है।

इस प्रोजेक्ट के तहत यूरोप, मिडिल-ईस्ट और भारत को समुद्री और रेल मार्ग के जरिए जोड़ा जाएगा।

सऊदी अरब में 1200 किमी का रेलमार्ग पहले ही तैयार है। जॉर्डन से लेकर इजराइल तक रेलमार्ग पर काम होना बाकी है। इसमें तेजी लाने के लिए मोदी के दौरे को अहम माना जा रहा है।

यूरोप तक जल्दी पहुंचेगा भारत का सामान

IMEC को यूरोप और साउथ एशिया को सीधा जोड़ने वाला नया ट्रेड रूट माना जा रहा है। अभी भारत से यूरोप तक कार्गो स्वेज कैनाल और लाल सागर से होकर गुजरता है। यह समुद्री रूट लंबा और भीड़भाड़ वाला है। इसमें समय भी ज्यादा लगता है।

IMEC कॉरिडोर की कुल लंबाई 6 हजार किलोमीटर है। इसमें यूरोप से इजराइल और UAE से भारत के बीच 3500 किलोमीटर लंबा समुद्री मार्ग भी शामिल है।

भारत से कार्गो पहले समुद्री रास्ते से UAE या सऊदी अरब पहुंचेगा। वहां से रेल के जरिए जॉर्डन और इजराइल होते हुए सीधे यूरोप तक भेज दिया जाएगा।

अटलांटिक काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक कॉरिडोर के बनने के बाद भारत से यूरोप तक सामान पहुंचाने में करीब 40% समय बचेगा। साथ ही लागत में भी 30% की कमी आएगी।

अभी भारत से किसी भी कार्गो शिप को जर्मनी पहुंचने में 36 दिन लगते हैं। इस रूट से 14 दिन की बचत होगी।

अभी भारत से किसी भी कार्गो शिप को जर्मनी पहुंचने में 36 दिन लगते हैं। इस रूट से 14 दिन की बचत होगी।

जॉर्डन किंग मोहम्मद साहब के सबसे करीबी वंशज

जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय को पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का सबसे करीबी वंशज माना जाता है। उनका संबंध सीधे हाशिमी वंश से है। मोहम्मद साहब कुरैश कबीले से थे।

कुरैश कबीले की एक शाखा बनू हाशिम थी। इसी बनू हाशिम से हाशिमी वंश शुरू हुआ, जिसे इस्लाम में सबसे प्रतिष्ठित वंश माना जाता है।

पैगंबर मोहम्मद साहब की बेटी हजरत फातिमा, उनके दामाद हजरत अली, उनके बेटे हसन और हुसैन आगे चलकर कई पीढ़ियों बाद मक्का के शरीफ बने। मक्का के शरीफ ही बाद में हाशिमी राजवंश के शासक बने।

जॉर्डन के शासक हाशिमी राजवंश से आते हैं। इस राजवंश ने करीब 700 साल तक मक्का पर शासन किया। पहले जॉर्डन के राजा शरीफ हुसैन बिन अली थे। मौजूदा राजा अब्दुल्ला द्वितीय, उन्हीं के पड़पोते हैं। इस तरह उनका वंश सीधे पैगंबर मोहम्मद साहब से जुड़ता है।

जॉर्डन एक संवैधानिक राजशाही है, जहां राजा बनने की प्रक्रिया संविधान में तय है। जॉर्डन का संविधान कहता है कि सत्ता का उत्तराधिकारी हाशिमी राजवंश से ही होगा और राजगद्दी पिता से बेटे को मिलेगी।

ये तस्वीर किंग अब्दुल्ला (दाएं से दूसरे), उनकी पत्नी क्वीन रानिया (बाएं से दूसरी) बेटी प्रिंसेज सलमा (एकदम दाएं) और बेटे क्राउन प्रिंस हुसैन (बाएं) की है।

ये तस्वीर किंग अब्दुल्ला (दाएं से दूसरे), उनकी पत्नी क्वीन रानिया (बाएं से दूसरी) बेटी प्रिंसेज सलमा (एकदम दाएं) और बेटे क्राउन प्रिंस हुसैन (बाएं) की है।

जॉर्डन मिडिल ईस्ट का इकलौता देश जहां तेल नहीं

जॉर्डन मिडिल ईस्ट का इकलौता देश है, जिसे ‘नो ऑयल’ देश कहा जाता है। हालांकि इजराइल, लेबनान, यमन और बहरीन जैसे देशों में भी तेल का उत्पादन लगभग न के बराबर होता है, लेकिन इन देशों में थोड़ा बहुत तेल होने या भविष्य में ज्यादा तेल होने की संभावना है। इसलिए ये देश नो ऑयल देश नहीं कहे जाते।

दरअसल, मिडिल ईस्ट के जिन देशों में तेल के विशाल भंडार हैं, वहां करोड़ों साल पहले समुद्र मौजूद था। समुद्री जीव मरने के बाद वहां के तलछटी चट्टानों में कीचड़, रेत और मिट्टी के साथ दबकर तेल में बदल गए।

दूसरी तरफ जॉर्डन का ज्यादातर हिस्सा रेगिस्तानी और पहाड़ी चट्टानों से बना है, जो समुद्र के नीचे नहीं था, इसलिए यहां तेल बनने की प्रक्रिया नहीं हो पाई।

तेल न होने के बावजूद जॉर्डन के पास फॉस्फेट और पोटाश अच्छी मात्रा में है। ये दोनों उर्वरकों में इस्तेमाल होते हैं और जॉर्डन की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अहम हैं।

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