सोनीपत जिला प्रशासन ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप-4) के तहत पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है।
वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए सोनीपत जिला प्रशासन ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप-4) के तहत पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त सुशील सारवान के नेतृत्व में जिलेभर में व्यापक छापेमारी और
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ग्रेप-4 के तहत जिलेभर में ताबड़तोड़ कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन सोनीपत ने गुरुवार को बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया। देर शाम तक 19 संयुक्त टीमों ने 500 से अधिक औद्योगिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। उपायुक्त सुशील सारवान की अगुवाई में चारों उपमंडल अधिकारियों, शुगर मिल प्रबंधन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में कुल 19 टीमें बनाई गईं। इन टीमों में 70 से अधिक अधिकारी और भारी पुलिस बल शामिल रहा।

सुप्रीम कोर्ट और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन सोनीपत ने गुरुवार को बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया
राई रेस्ट हाउस बना अस्थायी कंट्रोल रूम
सभी अधिकारी और पुलिस बल राई रेस्ट हाउस में एकत्रित हुए, जिसे अस्थायी कंट्रोल रूम बनाया गया। उपायुक्त ने मौके पर टीमों को दिशा-निर्देश देकर तत्काल कार्रवाई के लिए रवाना किया और पूरे अभियान की निगरानी की।
टीमों ने उन औद्योगिक इकाइयों की जांच की, जिन पर प्रदूषण फैलाने या नियमों की अनदेखी के आरोप थे। निरीक्षण के दौरान ईंधन के प्रकार, प्रदूषण नियंत्रण उपकरण, उत्सर्जन मानकों और निर्माण गतिविधियों की गहन जांच की गई।

देर शाम तक 19 संयुक्त टीमों ने 500 से अधिक औद्योगिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया।
अनियमितताओं पर सीलिंग व बिजली कटौती की सिफारिश
जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया गया, वहां मौके पर रिपोर्ट तैयार कर कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) को भेजी गई। सीलिंग, बिजली कनेक्शन काटने, जुर्माना लगाने जैसी सख्त कार्रवाई की सिफारिश की जा रही है।
उपायुक्त ने बताया कि जब एयर क्वालिटी इंडेक्स 450 से ऊपर गंभीर श्रेणी में पहुंचता है, तब ग्रेप-4 लागू किया जाता है। इस स्थिति में निर्माण कार्य, डीजल जनरेटर, कोयला आधारित उद्योग और प्रतिबंधित वाहनों पर रोक लगाई जाती है।

पायुक्त सुशील सारवान की अगुवाई में चारों उपमंडल अधिकारियों, शुगर मिल प्रबंधन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में कुल 19 टीमें बनाई गईं।
फिरोजपुर बांगर में 20 पिट फर्नेस बंद
खरखौदा क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान फिरोजपुर बांगर में करीब 20 उद्योगों में पिट फर्नेस जलती हुई पाई गईं। इन्हें तत्काल बंद करवाकर सीएक्यूएम को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई।
गोहाना उपमंडल में कुंडली और प्याऊ मनियारी क्षेत्र की फैक्ट्रियों में भारी मात्रा में डस्ट और प्रतिबंधित डीजल जनरेटर पाए गए। कई उद्योगों में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम भी नहीं मिले। गन्नौर क्षेत्र में कई फैक्ट्रियों और चावल मिलों में निर्माण गतिविधियां और कोयला जलता हुआ पाया गया, जो ग्रेप-4 के तहत प्रतिबंधित है। संबंधित इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
आयुर्वेदिक दवा कंपनियों में भी खामियां उजागर
सोनीपत उपमंडल में आयुर्वेदिक दवा कंपनियों की जांच के दौरान भी कई अनियमितताएं सामने आईं। इनकी रिपोर्ट भी सीएक्यूएम को भेजी गई है।
डीसी सुशील सारवान ने स्पष्ट किया कि एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला प्रशासन आमजन से भी प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग की अपील करता है।