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- Clear Your Confusion And Enter The New Year 2026, Lord Krishna Lesson To Arjun, Mahabharata Story, Life Management Tips In Hindi
7 घंटे पहले
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साल 2025 खत्म हो रहा है और नया साल 2026 शुरू होने वाला है। नया साल यानी नई शुरुआत, अगर हमारी नई शुरुआत सही हो जाए तो पूरा साल लाभदायक बन सकता है। श्रीमद् भगवद्गीता में अर्जुन ने युद्ध से पहले अपना गांडिव नीचे रख दिया था और युद्ध करने का विचार ही छोड़ दिया था, उस समय श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। इस उपदेश के बाद अर्जुन के सारे भ्रम दूर हो गए और वे एक नई शुरुआत करने के लिए तैयार हो गए। इस प्रसंग में हमारे लिए ये संदेश है कि नई साल में हमें सभी तरह डर और भ्रम (कन्फ्यूजन) दूर करके आगे बढ़ना चाहिए, तभी सफलता मिलेगी।
महाभारत युद्ध से ठीक पहले अर्जुन गहरे भ्रम में उलझ गए थे। उनके सामने अपने कुटुम्ब के लोग, गुरु और मित्र खड़े थे। ये सब देखकर अर्जुन का मन युद्ध से हट गया, धनुष-बाण हाथ से गिर गए। इसके बाद अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा कि कि मैं ये युद्ध नहीं करना चाहता। ये अर्जुन के जीवन का सबसे कमजोर समय था, लेकिन इसी समय में अर्जुन के जीवन नई शुरुआत भी हुई थी।
अर्जुन के भ्रम दूर करने के लिए श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया। वे अर्जुन को समझाते हैं कि जीवन में परिवर्तन से डरना स्वाभाविक है, लेकिन कर्तव्य से भागना सही नहीं है।
भगवान ने आगे कहा कि आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है, केवल शरीर बदलता है। जैसे पुराने वस्त्र त्यागकर नए वस्त्र धारण किए जाते हैं, वैसे ही जीवन में भी नए-नए चरण आते-जाते रहते हैं।
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ये भी समझाया कि कर्म करना हमारे हाथ में है, लेकिन उसका फल हमारे हाथ में नहीं है। जब व्यक्ति परिणाम के डर को छोड़कर सही काम करता है, तभी वह सच्ची नई शुरुआत कर पाता है। इसके बाद भगवान अर्जुन को अपने भय, मोह और भ्रम से बाहर निकलने के लिए प्रेरित करते हैं।
गीता उपदेश के बाद अर्जुन का पूरा दृष्टिकोण बदल जाता है। जो अर्जुन युद्ध से भागना चाहता था, वही अर्जुन अब पूरे विश्वास और साहस के साथ एक नई शुरुआत करने के लिए तैयार हो जाता है। ये परिवर्तन केवल युद्ध लड़ने का नहीं था, बल्कि सोच, आत्मबल और उद्देश्य की नई शुरुआत थी।
प्रसंग की सीख
श्रीकृष्ण और अर्जुन के इस प्रसंग की सीख ये है कि नई शुरुआत बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन से होनी चाहिए। जब कोई रास्ता कठिन लगे, तब किसी अनुभवी से मार्गदर्शन लेना चाहिए। अपने कर्तव्य को समझें और भय को त्यागें, तभी सकारात्मक नई शुरुआत हो सकती है।
नए साल की शुरुआत में ध्यान रखेंगे ये बातें, तो मिल सकती है सफलता
- बीते कल को स्वीकार करें- नई शुरुआत करने से पहले यह जरूरी है कि आप अपने बीते को नकारें नहीं। जो हुआ, उससे सीख लें और स्वयं को दोष देना छोड़ दें। पुरानी गलतियों से सीख लेकर नए साल में प्रवेश करें।
- स्पष्ट लक्ष्य तय करें- नई शुरुआत बिना दिशा के नहीं हो सकती। ये स्पष्ट करें कि आप क्या बदलना चाहते हैं और क्यों। लक्ष्य स्पष्ट होगा, तभी सकारात्मक शुरुआत हो पाएगी।
- छोटे-छोटे बदलावों से शुरुआत करें- जीवन में हर बदलाव बड़ा होना जरूरी नहीं। छोटे-छोटे बदलावों को अपनाकर भी आगे बढ़ सकते हैं। ऐसा करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और हमारे कामों में निरंतरता आती है।
- डर को पहचानें और उसे दूर करें- नई शुरुआत का सबसे बड़ा शत्रु डर है। अपने डर को समझें और उसे दूर करें। डर दूर होगा, तभी नई शुरुआत हो पाएगी।
- लाइफ स्टाइल में सकारात्मक परिवर्तन करें- सुबह जल्दी उठना, ध्यान करना, अच्छी किताबें पढ़ना, व्यायाम करना, अपनी लाइफ स्टाइल में ऐसे छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तन जरूर करें। लाइफ स्टाइल बदलेगी तो जीवन की दिशा भी बदलेगी।
- सकारात्मक लोगों की संगति में रहें- जिन लोगों के साथ आप समय बिताते हैं, उनका प्रभाव काफी गहरा होता है। प्रेरणादायक और सकारात्मक लोगों के साथ रहेंगे तो जीवन में सकारात्मकता बनी रहेगी।
- धैर्य रखें- नई शुरुआत तुरंत परिणाम नहीं देती है। हर फल समय पर ही मिलता है। इसलिए धैर्य रखें।
- स्वयं पर भरोसा रखें- अपनी दूसरों से तुलना न करें। खुद की प्रगति देखें। आत्मविश्वास ही हर नई शुरुआत की नींव है। खुद पर भरोसा रखें और आगे बढ़ते रहें।
- कृतज्ञता और संतुष्टि का भाव रखें- जो चीजें हमारे पास हैं, उनके लिए आभार व्यक्त करें, अपनी चीजों से संतुष्ट रहें। कृतज्ञता और संतुष्टि का भाव रहेगा तो किसी भी स्थिति में मन अशांत नहीं होगा।