सोनीपत के सिविल हॉस्पिटल में पोस्टमॉर्टम करवाने के दौरान पहुंचे परिजन
सोनीपत जिले के एक गांव के 50 वर्षीय बुजुर्ग नंबरदार की गंदे नाले में गिरने से मौत हो गई। रोज की तरह खाना खाने के बाद टहलने निकले नंबरदार कुछ ही दूरी पर फिसलकर नाले में जा गिरे और बाहर नहीं निकल पाए। देर रात तक घर न लौटने पर परिजनों ने तलाश शुरू की तो
.
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। शाम की सैर बनी मौत का कारण जानकारी के अनुसार गांव खेवड़ा निवासी जयकरण पिछले करीब 10 वर्षों से गांव में नंबरदार की जिम्मेदारी निभा रहे थे। सोमवार रात करीब 9:15 बजे वह रोज की तरह खाना खाने के बाद टहलने के लिए घर से निकले थे।
घर से कुछ ही दूरी पर चलते समय गांव के गंदे नाले के पास उनका पैर फिसल गया और वह अचानक मुंह के बल नाले में गिर पड़े। नाला गहरा और कीचड़ से भरा होने के कारण वह बाहर नहीं निकल सके।

आनन-फानन में उन्हें सोनीपत के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
देर रात तक घर न लौटने पर शुरू हुई तलाश जब जयकरण देर रात तक घर नहीं पहुंचे तो परिजनों को चिंता हुई। आसपास तलाश की गई तो नाले में उनका शव पड़ा दिखाई दिया। ग्रामीणों की मदद से उन्हें बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी हालत गंभीर हो चुकी थी। आनन-फानन में उन्हें सोनीपत के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया यह हादसा फिसलने के कारण हुआ प्रतीत हो रहा है, मामले में आवश्यक कार्रवाई की गई है।

शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया।
खेती-बाड़ी कर परिवार का कर रहे थे पालन-पोषण जयकरण न केवल गांव के नंबरदार थे, बल्कि अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेती-बाड़ी कर परिवार का भरण-पोषण भी कर रहे थे। गांव में उनकी पहचान एक सरल और जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में थी। उनके निधन से गांव के लोगों में भी शोक की लहर है। दो बेटों के सिर से उठा पिता का साया जयकरण अपने पीछे दो बेटे छोड़ गए हैं। बड़ा बेटा 24 वर्षीय अभिषेक गांव में ही रहता है और पढ़ाई कर रहा है, जबकि छोटा बेटा 19 वर्षीय विशाल पढ़ाई के लिए अमेरिका गया हुआ है। पिता की अचानक मौत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिता के अंतिम दर्शन भी नहीं कर सका बेटा परिजनों ने बताया कि विशाल पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाया। जयकरण ने बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए विशाल को विदेश भेजा था और वह अपने पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश कर रहा था। पिता की मौत की सूचना मिलने के बावजूद दूरी और परिस्थितियों के कारण वह अंतिम समय में उनके दर्शन भी नहीं कर सका। परिवार का रो-रो कर बुरा हाल जयकरण की मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। उनकी माता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग सांत्वना देने के लिए घर पहुंच रहे हैं, लेकिन परिवार के इस गहरे दुख को शब्दों में बयां करना मुश्किल है।