फरीदाबाद में स्टेडियम के शौचालय में मिली सिरिंज-प्रतिबंधित दवाएं:खिलाड़ियों पर डोपिंग का शक, चेतावनी नोटिस लगाए; कोच रखेंगे निगरानी

Actionpunjab
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फरीदाबाद जिले सेक्टर-12 स्थित राज्य खेल स्टेडियम में प्रतिबंधित दवाओं के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस सरकारी खेल परिसर के दौरे के दौरान शौचालयों के फर्श पर इस्तेमाल की गई सिरिंज और प्रतिबंधित दवाओं के पैकेट पड़े मिले, जिससे खिलाड़ियों के बीच डोपिंग के संभावित चलन की आशंका गहरा गई है। स्टेडियम के शौचालय एथलेटिक्स, जिम्नास्टिक और जूडो हॉल के पास स्थित हैं। ये सभी दवाएं एंटी-डोपिंग नियमों के तहत सख्त रूप से प्रतिबंधित हैं, क्योंकि इनसे सहनशक्ति बढ़ती है, दर्द दबता है और रिकवरी तेज होती है, लेकिन इससे शरीर को गंभीर नुकसान भी पहुंचता है। रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाती है एक डॉक्टर ने बताया कि इन दवाओं का इस्तेमाल आमतौर पर किडनी रोग या कीमोथेरेपी से जुड़े एनीमिया के इलाज में किया जाता है। यह दवा लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाती है, जिससे शरीर की ऑक्सीजन वहन क्षमता बढ़ती है। इसी वजह से इसका दुरुपयोग धावकों और तैराकों जैसे सहनशक्ति आधारित खेलों में डोपिंग के तौर पर किया जाता रहा है। स्टेडियम के शौचालय में इसी दवा का एक खाली पैकेट भी मिला। बाहरी लोगों का काम नहीं हो सकता- कोच स्टेडियम अधिकारियों ने बताया कि पुराने भवन के शौचालयों में इससे पहले भी सिरिंज और दवाओं के अवशेष मिले हैं। जब यह सवाल उठाया गया कि कहीं इनका इस्तेमाल बाहरी लोग तो नहीं कर रहे, तो नाम न छापने की शर्त पर कोच ने इस आशंका को सिरे से खारिज कर दिया। एक वरिष्ठ कोच ने कहा कि यह काम बाहरी लोगों का नहीं हो सकता। यहां नियमित अभ्यास करने वाले खिलाड़ी ही स्टेडियम के समय, निगरानी की कमियों और सुनसान जगहों को जानते हैं। एक अन्य कोच ने कहा कि कोई बाहरी व्यक्ति टूटे-फूटे शौचालयों में आकर खुद को इंजेक्शन नहीं लगाएगा। ये खिलाड़ी जल्दी नतीजे पाने की चाह में ऐसा कर रहे हैं, लेकिन यह उनके शरीर को अंदर से खोखला कर रहा है। इंजेक्शन टिके रहने का एकमात्र तरीका स्टेडियम में प्रशिक्षण ले रहे एक खिलाड़ी ने भी इस बात से इनकार नहीं किया। उसने कहा कि हर कोई जल्दी आगे बढ़ना चाहता है। कुछ खिलाड़ियों को लगता है कि इंजेक्शन ही टिके रहने का एकमात्र तरीका है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की दवाओं का गलत इस्तेमाल हार्मोनल असंतुलन, लीवर और किडनी को नुकसान, दिल की बीमारियों और लंबे समय तक चलने वाली मानसिक समस्याओं का कारण बन सकता है। इसके अलावा डोप टेस्ट में एक बार फेल होने पर खिलाड़ी का करियर हमेशा के लिए खत्म हो सकता है। एक कोच ने चेतावनी देते हुए कहा कि एक इंजेक्शन वर्षों की मेहनत पर पानी फेर सकता है। स्टेडियम में चेतावनी नोटिस लगाए मामला सामने आने के बाद स्टेडियम परिसर में चेतावनी नोटिस लगाए गए हैं, जिनमें लिखा है कि खेल परिसर में नशीले पदार्थों का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित है। किसी भी खिलाड़ी या बाहरी व्यक्ति के पकड़े जाने पर उसे पुलिस के हवाले किया जाएगा। यह आदेश जिला खेल अधिकारी, फरीदाबाद के निर्देश पर जारी किया गया है। मामला सामने आते ही जिला खेल अधिकारी ने सख्ती दिखाई। एथलेटिक्स के सभी कोचों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है कि टॉयलेट में इंजेक्शन कैसे पहुंचे और इसमें कौन खिलाड़ी शामिल हैं। साफ शब्दों में कहा गया कि जो भी खिलाड़ी दोषी पाया गया, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसी हरकतों से खेल विभाग बदनाम- अधिकारी फरीदाबाद की जिला खेल अधिकारी नरेश यादव ने बताया कि अधिकतर ऐसे मामले आउटसाइडर खिलाड़ियों से जुड़े होते हैं, जो यहां प्रेक्टिस करने आते हैं। खासतौर पर आर्मी भर्ती की तैयारी करने वाले कुछ युवा दौड़ में आगे निकलने के लिए इस तरह के नशीले इंजेक्शन का सहारा लेते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी हरकतों से खेल विभाग बदनाम हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा नशा छोड़ो अभियान के तहत खिलाड़ियों को जागरूक किया जाता है, इसके बावजूद कुछ लोग गलत रास्ते पर जा रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी निर्देशों की प्रतियां खिलाड़ियों को कोई गुमराह कर रहा है, जिसकी वजह से वे नशे की ओर धकेले जा रहे हैं उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों से अपील की है कि वह इस तरीके से किसी भी प्रकार का इंजेक्शन ना ले और ना ही किसी के बहकावे में आए। साथ ही एथलेटिक्स कोच धर्मेंद्र और जूनियर कोच भूपेंद्र को भवन की निगरानी की सीधी जिम्मेदारी सौंपी गई है। चेतावनी दी, कि यदि आगे किसी भी शौचालय से दोबारा सिरिंज या दवाएं मिली, तो इसे गंभीर सुरक्षा चूक माना जाएगा। इस संबंध में निर्देशों की प्रतियां पंचकूला और गुरुग्राम स्थित वरिष्ठ खेल अधिकारियों को भी भेजी गई हैं।

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