WB Election Commission Seeks Extension for Supreme Court Voter List Deadline

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नई दिल्ली/कोलकाता4 घंटे पहले

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पश्चिम बंगाल में 1.25 करोड़ वोटर्स को नाम-उम्र में गड़बड़ी पर नोटिस जारी किए गए हैं। File - Dainik Bhaskar

पश्चिम बंगाल में 1.25 करोड़ वोटर्स को नाम-उम्र में गड़बड़ी पर नोटिस जारी किए गए हैं। File

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की समय-सीमा बढ़ाई जा सकती है। चुनाव आयोग 14 जनवरी को जारी होने वाली फाइनल वोटर लिस्ट की तारीख बढ़ाने पर विचार कर रहा है।

आयोग ने सुनवाई की अंतिम तारीख 7 फरवरी और फाइनल वोटर लिस्ट की अंतिम तारीख 14 फरवरी तय की थी। EC अधिकारी ने कहा- लोकल लेवल पर लिस्ट लगाना, हर वोटर को रसीद देना लंबी प्रोसेस है। जल्दबाजी नहीं कर सकते।

अधिकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन करना मौजूदा समय-सीमा में मुश्किल है। इसलिए अतिरिक्त समय-प्रशासनिक तैयारी की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि अंतिम फैसला होना बाकी है।

19 जनवरी की SC ने लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस वाले 1.25 करोड़ वोटर्स को लिस्ट ग्राम पंचायत भवन, ब्लॉक कार्यालय और वार्ड कार्यालय में सार्वजनिक करने के निर्देश दिए थे।

16 दिसंबर: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी

SIR के बाद राज्य की फाइनल ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 16 दिसंबर को जारी हुई थी। बंगाल में 58 लाख 20 हजार 898 वोटरों के नाम हटाने के लिए तय किए गए थे। इन पर दावे और आपत्तियों की लिमिट पहले 15 जनवरी तक थी, जिसे बढ़ाकर 19 जनवरी किया गया। सुनवाई अभी भी 7 फरवरी तक तय है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई तारीखों में

19 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट ने वोटर्स को नाम जुड़वाने का मौका दिया

सुप्रीम कोर्ट ने लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस के तहत पश्चिम बंगाल के 1.25 करोड़ वोटर्स को अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए एक और मौका दिया। कहा कि वे 10 दिन में अपने डॉक्यूमेंट्स चुनाव आयोग को पेश करें।

चुनाव आयोग ने राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान नाम, सरनेम, आयु में गड़बड़ी की वजह 1.25 करोड़ वोटर्स को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस जारी किया था।

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने कहा था कि सिर्फ तर्क के आधार पर आम लोगों को परेशान नहीं किया जा सकता है। चुनाव आयोग लोगों की परेशानी को समझे। पूरी खबर पढ़ें…

15 जनवरी: चुनाव आयोग ने कहा था- हम देश निकाला नहीं दे रहे

चुनाव आयोग ने SC में कहा था- SIR के तहत आयोग सिर्फ यह तय करता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने के योग्य है या नहीं। इससे सिर्फ नागरिकता वेरिफाई की जाती है। SIR से किसी का डिपोर्टेशन (देश से बाहर निकालना) नहीं होता, क्योंकि देश से बाहर निकालने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। पूरी खबर पढ़ें…

6 जनवरी: चुनाव आयोग ने कहा- लिस्ट को सही रखना हमारा काम

चुनाव आयोग (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसे वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) कराने का पूरा अधिकार है। आयोग ने यह भी बताया कि उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि कोई भी विदेशी नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल न हो।

आयोग की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और जज जैसे सभी प्रमुख पदों पर नियुक्ति के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य शर्त है। पूरी खबर पढ़ें…

4 दिसंबर: सुप्रीम कोर्ट बोला- BLOs के काम के दबाव को कम करें

सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिसंबर को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया था कि वे SIR में लगे बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के काम के दबाव को कम करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति पर विचार करें।

सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कझगम (TVK) की उस याचिका पर दिया, जिसमें मांग की गई थी कि समय पर काम ना कर पाने BLOs के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई न की जाए। पूरी खबर पढ़ें…

26 नवंबर: चुनाव आयोग बोला- राजनीतिक पार्टियां डर का माहौल बना रहीं

सुप्रीम कोर्ट में 26 नवंबर को SIR के खिलाफ दायर तमिलनाडु, बंगाल और केरल की याचिका पर सुनवाई हुई थी। इस दौरान चुनाव आयोग ने कहा- SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दल जानबूझकर डर का माहौल बना रही हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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चुनाव आयुक्तों को आजीवन सुरक्षा, SC का केंद्र को नोटिस:कहा- छूट संविधान की भावना के खिलाफ हो सकती है, न्यायिक जांच की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (EC) को उनके आधिकारिक कामों के लिए आजीवन कानूनी इम्युनिटी (सुरक्षा) देने वाला प्रावधान संविधान की भावना के खिलाफ हो सकता है। लॉ ट्रेंड के मुताबिक, कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग (EC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पूरी खबर पढ़ें…

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