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लखीमपुर के खीरी टाउन में रमजान का महीना नजदीक आते ही सूतफेनी और खाजा की मांग बढ़ गई है। इन पारंपरिक मिठाइयों की खुशबू दूर-दूर तक फैलने लगी है, जो इस कस्बे की पहचान बन चुकी हैं। कस्बे में संचालित करीब पांच कारखानों में कारीगर पारंपरिक तरीके से मैदा और रिफाइंड तेल का उपयोग कर सूतफेनी व सेंवई तैयार करते हैं। इनमें चीनी, इलायची पाउडर और कटे बादाम-पिस्ता मिलाकर खास स्वाद दिया जाता है। देसी घी से बनी सूतफेनी की मांग सबसे अधिक रहती है। दुकानदारों के अनुसार, सामान्य दिनों में एक दुकान पर प्रतिदिन 10 से 15 किलोग्राम तक सूतफेनी की बिक्री होती है। रमजान के दौरान यह बिक्री बढ़कर 25 से 30 किलोग्राम प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। सूतफेनी 120 से 160 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिक रही है, जबकि खाजा की भी अच्छी खासी मात्रा में बिक्री होती है। खीरी से इन मिठाइयों की नियमित आपूर्ति सीतापुर, लहरपुर, लखनऊ, बरेली, पूरनपुर, पीलीभीत, बहराइच और नानपारा सहित कई जिलों में की जाती है। रिश्तेदारों और परिचितों के माध्यम से यह मिठास नेपाल के साथ-साथ सऊदी अरब, दुबई, मस्कट और बहरीन जैसे देशों तक भी पहुंच रही है, जहां रमजान में इसकी विशेष मांग रहती है। स्थानीय हलवाइयों का कहना है कि यह काम पीढ़ियों से चला आ रहा है। रमजान के दौरान देर रात तक ऑर्डर पूरे किए जाते हैं। इस अवधि में मेहनत अधिक होती है, लेकिन अच्छी बिक्री से कारीगरों को रोजगार और मुनाफा दोनों मिलता है।
खीरी टाउन की सूतफेनी और खाजा की मांग बढ़ी:रमजान में दोगुनी हुई बिक्री, विदेशों तक पहुंच
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