गोरखपुरकुछ ही क्षण पहले
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यूपी में रसोई गैस (LPG) की किल्लत हो गई है। लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर समेत कई शहरों में बुकिंग के 4 से 5 दिन बाद सिलेंडर नहीं मिल रहे। गैस एजेंसियों के बाहर लाइनें लगने लगी हैं। लखनऊ की चटोरी गली के 40 दुकान सिलेंडर नहीं मिलने से बंद हो गए हैं।
चटोरी गली एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अविनाश ने बताया कि बंदी की वजह से लगभग 1 लाख रुपए से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ। वहीं गोरखपुर में एजेंसी के बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रहे लोगों ने कहा- 2-3 दिन से लाइन लगा रहे हैं। ऐसा लग रहा कि 15-20 साल पहले जैसे हालात हो गए हैं, जब गैस सिलेंडर के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था।
हालांकि, अफसरों का कहना है कि परेशान होने की जरूरत नहीं है। लखनऊ के जिला पूर्ति अधिकारी विजय प्रताप सिंह ने कहा- फिलहाल किसी तरह की कमी की स्थिति नहीं है। जिले में 25 दिन का कोटा उपलब्ध है।
गैस कंपनियों ने भी ग्राहकों को मैसेज भेजकर गैस की किल्लत की खबरों से इनकार किया। कहा- ईंधन की कमी के दावे भ्रामक और निराधार हैं। देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक है।
इधर, तेल कंपनियों ने घटते स्टॉक के चलते कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की डिलीवरी पर अघोषित रोक लगा दी है। एजेंसियों को फिलहाल सिर्फ घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई पर फोकस करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसका सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों पर पड़ रहा है। उन्हें कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। इसके चलते आम लोगों में भी डर का माहौल है। कई शहरों में घरेलू सिलेंडर की डिमांड अचानक बढ़ गई है।
बता दें कि यूपी में लगभग 4.26 करोड़ घरेलू एलपीजी कनेक्शन हैं। इसमें उज्ज्वला योजना के तहत करीब 1.87 करोड़ कनेक्शन शामिल हैं। प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 5-6 लाख सिलेंडर की खपत होती है।
तस्वीरें देखिए-

गोरखपुर में गैस एजेंसी के बाहर सुबह से ही लंबी लाइनें लगी रहीं। भीड़ ज्यादा बढ़ने पर पुलिस पहुंची।

गोंडा में गैस एजेंसी के बाहर बुधवार की सुबह से ही लंबी लाइनें लग गई हैं।

देवरिया में बुधवार की सुबह से ही लोग सिलेंडर लेकर एजेंसी पर पहुंच गए।
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सिलेंडर की किल्लत रोकने के लिए LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश
सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने यह आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी।
सभी कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को करनी होगी। सरकारी तेल कंपनियों में इंडियन ऑयल (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) शामिल है। इसका मकसद कंज्यूमर्स को बिना रुकावट गैस सिलेंडर की सप्लाई है।
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गैस सप्लाई संकट की 2 बड़ी वजह जानिए-
1. ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा।
दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।
2. प्लांट पर ड्रोन हमले से LNG का प्रोडक्शन रुका
पिछले हफ्ते अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर स्ट्राइक की थी। इसके जवाब में ईरान ने UAE, कतर, कुवैत और सऊदी जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और पोर्ट्स को निशाना बनाया है।
ईरान के ड्रोन हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने LNG प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया है। इससे भारत में गैस की सप्लाई घट गई है। भारत अपनी जरूरत की 40% LNG (करीब 2.7 करोड़ टन सालाना) कतर से ही आयात करता है।
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4 दिन पहले सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़ाए
4 दिन पहले सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा कर दिया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम की LPG गैस अब 913 रुपए की मिल रही है। पहले यह 853 रुपए की थी। वहीं 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपए का इजाफा किया गया है। यह अब 1883 रुपए का मिल रहा है। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई हैं।
इससे पहले सरकार ने 8 अप्रैल 2025 को घरेलू सिलेंडर के दामों में 50 रुपए का इजाफा किया था। यानी ये बढ़ोतरी करीब एक साल बाद की गई है। वहीं 1 मार्च 2026 को कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 31 रुपए तक बढ़ाए गए थे।
सरकार ने गैस के दामों में बढ़ोत्तरी ऐसे वक्त की है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते देश में गैस की किल्लत की आशंका जताई गई है।
