डबवाली में नसाडा नाला टूटा, किसान परेशान:जोगेवाला गांव में ओवरफ्लो हुआ; 50 फुट की दरार, 150 एकड़ में फसल जलमग्न

Actionpunjab
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सिरसा में पंजाब की ओर से बहकर आने वाला नसाडा नाला हर बार की तरह इस बार भी हरियाणा सीमा से सटे गांव जोगेवाला और डबवाली क्षेत्र के किसानों के लिए आफत बन गया है। नाले की समय पर खुदाई न होने और निकासी व्यवस्था दुरुस्त न किए जाने के कारण सोमवार देर रात यह नाला ओवरफ्लो होकर टूट गया। इससे करीब 150 एकड़ में खड़ी गेहूं और सरसों की फसल जलमग्न हो गई। जानकारी के अनुसार, सोमवार रात करीब 12 से 1 बजे के बीच अचानक पानी की मात्रा बढ़ने से नाला जोगेवाला की तरफ से टूट गया। पिछले आठ दिनों से आसपास के गांवों के किसान नाले पर टिकरी पहरा दे रहे थे, लेकिन पानी का दबाव इतना बढ़ गया कि तटबंध टूट गया। मौके पर मौजूद किसानों ने तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दी, लेकिन विभागीय टीम कई घंटे बाद पहुंची। तब तक करीब 50 फुट चौड़ी दरार बन चुकी थी। किसानों ने खुद भरा दरार, पर बहाव रोकना मुश्किल किसानों ने अपने स्तर पर मिट्टी और बोरी डालकर दरार को भरने का प्रयास किया, लेकिन पानी का बहाव तेज होने के कारण उसे रोक पाना मुश्किल हो गया। खेतों में लगातार पानी भरता चला गया, जिससे फसलें पूरी तरह डूब गईं। किसानों ने विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया किसान महिपाल सिंह डूमवाली, सुरजीत सिंह, भानु प्रताप, रविंद्र सिंह, हरजीत सिंह, डिंपी, खुशदीप सिंह रिंकू और राजवीर ने बताया कि पिछले आठ दिनों से वे दिन-रात नाले पर पहरा दे रहे थे। उन्होंने कहा कि विभाग को पहले ही खतरे की जानकारी दी गई थी, लेकिन कोई स्थाई कदम नहीं उठाया गया। किसानों के अनुसार, अब तक यह नाला आठ बार टूट चुका है और हर बार नुकसान किसानों को ही झेलना पड़ता है। स्थाई समाधान और मुआवजे की मांग किसानों ने कहा कि नाले की आगे निकासी न होने के कारण बार-बार यह समस्या उत्पन्न होती है। उन्होंने मांग की कि नाले की करीब दो किलोमीटर तक खुदाई करवाई जाए और पानी की निकासी के लिए पाइपलाइन की व्यवस्था की जाए। किसानों ने हुए नुकसान की विशेष गिरदावरी करवाकर मुआवजा देने की मांग की है। दोनों तरफ के किसानों में हो चुका तनाव किसानों ने यह भी याद दिलाया कि 1996 में नाले के टूटने से पंजाब और हरियाणा के किसानों के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी, जबकि 1922 में भी इसी नाले के टूटने से भारी नुकसान हुआ था। उन्होंने कहा कि यदि पंजाब की ओर से तटबंध को न तोड़ा जाए और नाले की सफाई नियमित रूप से करवाई जाए, तो इस समस्या का स्थाई समाधान संभव है।

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