गर्भ में ही बच्चों में हो रही नसों की बीमारी:वाराणसी में ‘न्यूरो भारत कान्क्लेव’ में न्यूरोलाजिस्ट, नई तकनीक से इलाज पर मंथन

Actionpunjab
3 Min Read




वाराणसी में ‘2nd न्यूरो भारत कान्क्लेव-2025’ शनिवार को हुआ। 2 दिवसीय इस कान्क्लेव में देश के जाने माने न्यूराेलाजिस्ट पहुंचे हैं। नई तकनीक के जरिए ब्रेन व नसों के इलाज पर मंथन किया गया। सुपरस्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने वीडियो के जरिए अपने व्याख्यान दिए। सवाल-जवाब का भी सत्र आयोजित हुआ। सीनियर न्यूरोलाजिस्ट डॉ. पंकज गुप्ता ने कहा, छोटे बच्चों में जन्मजात न्यूरो प्राब्लम के केस बढ़ रहे हैं, यह बहुत तरह के होते हैं। जब बच्चा मां के पेट में होता है उस समय जो बनावट होती है उसमें कुछ प्राब्लम्स हो जाती है जिससे ब्रेन व स्पाइन के नसें सही नहीं बन पाती है। इससे पैदा होते ही बच्चाें के स्पाइन में एक गांठ होती है जिसकी वजह से पैर में पावर कम हो जाती है। जो स्पाइन की नसें होती हैं वह बाल की तरह बिल्कुल महीन होती हैं और ये बच्चों में और महीन होती है। ऐसे में नंगी आंखों से ऑपरेशन करना सेफ नही हैं इसलिए उसके माइक्रोस्कोप व ड्रिल्स हैं। इससे आसानी से ऑपरेशन करते हैं। ऐसे कुछ केस के ऑपरेशन हमने किए हैं। ऐसे हर महीने 8 से 10 केस के ऑपरेशन करते हैं। गर्भ में ही बच्चों में हो रही नसों की बीमारी वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. एनएन गोपाल ने ब्रेन में स्टेंट डालने की आधुनिक तकनीक पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा, हार्ट की तर्ज पर ब्रेन में स्टेंट डालना मरीजों के लिए काफी राहत भरा साबित हो रहा है। डाॅ. एनएन गोपाल ने कहा, “एन्यूरिज्म सर्जरी दिमाग में खून की गांठ ग्रंथि बन जाती है, जो कई बार अनजाने में फूट जाती है उससे ब्रेन हेमरेज हो जाता है। इसमें नई टेक्निक एंडोवेस्कुलर यानी बिना ऑपरेशन के हम नस में खून की नली में कैथेटर डालते हैं और उसके जरिए हम स्टंट डाल देते हैं और क्वाइलिंग करते हैं, इसे हम ब्लाक कर देते हैं। इसके लिए पहले सिर्फ ओपन सर्जरी से ही हम लोग करते थे, हालांकि अभी भी ज्यादातर जगहों पर ओपन सर्जरी हो रही है।”

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *