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चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि के शुभ अवसर पर बहुप्रतीक्षित चौरासी कोसी परिक्रमा का विधिवत शुभारंभ गुरुवार को भक्तिमय वातावरण में हुआ। यह परिक्रमा, जो सांस्कृतिक रूप से अयोध्या की परिधि मानी जाती है, श्रद्धालुओं के लिए केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मोक्ष का पथ भी है। कारसेवक पुरम से भी सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों श्रद्धालुओं का दल सरयू तट से होते हुए मखौड़ा धाम के लिए प्रस्थान कर चुका है। श्री सद्गुरु कृपा मंडल, श्री अयोध्या धाम के तत्वावधान में आयोजित इस पावन परिक्रमा का नेतृत्व गया शरण कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में सैकड़ों संत-महंत एवं श्रद्धालु इस आध्यात्मिक यात्रा में सम्मिलित हुए हैं। गोलाघाट स्थित सद्गुरु सदन से प्रारंभ हुई यह परिक्रमा मां सरयू के पूजन के उपरांत आगे बढ़ी, जहां भक्ति की सरिता और आस्था का प्रवाह एकाकार होता दिखाई दिया। महंत गया दास के नेतृत्व में भी अनेक संत अयोध्या से इस दिव्य यात्रा पर निकल पड़े हैं।
तीन प्रमुख दलों में विभाजित यह यात्रा मखौड़ा धाम की ओर अग्रसर हुई है, जहां से वैशाख कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से परिक्रमा का मुख्य चरण प्रारंभ होगा। यह यात्रा पाँच जनपदों से होते हुए पुनः अयोध्या लौटेगी और 25 अप्रैल को सीता नवमी के पावन अवसर पर रामकोट की परिक्रमा तथा सीता कुंड पर रामार्चा पूजन के साथ सम्पन्न होगी। स्वामी गया शरण ने बताया कि इस वर्ष लगभग 500 से अधिक संत, महंत एवं भक्तगण अत्यंत उत्साह और श्रद्धा के साथ इस परिक्रमा में सम्मिलित हुए हैं। सनातन मान्यताओं के अनुसार, चौरासी कोसी परिक्रमा करने से मनुष्य 84 लाख योनियों के बंधन से मुक्त होकर परमधाम की प्राप्ति करता है। यह परिक्रमा केवल भौगोलिक परिधि का भ्रमण नहीं, बल्कि आत्मा की परम सत्य की ओर यात्रा है—जहां हर कदम पर श्रद्धा, हर श्वास में भक्ति और हर भाव में प्रभु श्रीराम का स्मरण समाहित है।
अयोध्या के 3 स्थानों से 84 कोसी परिक्रमा रवाना हुई:रात्रि विश्राम के बाद 3 अप्रैल को मखौड़ा धाम बस्ती से आरंभ होगी
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