वैशाख मास का पहला चतुर्थी व्रत आज:रविवार और चतुर्थी के योग में करें गणेश जी के साथ सूर्य देव की पूजा, गुड़ का करें दान

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आज (रविवार, 5 अप्रैल) वैशाख मास के कृष्ण पक्ष का चतुर्थी व्रत है। यह व्रत घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की कामना से किया जाता है। इस बार चतुर्थी का संयोग रविवार के साथ होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है। इस योग में भगवान गणेश के साथ-साथ सूर्य देव की भी पूजा करनी चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, शास्त्रों में पंचदेवों का जिक्र है, इनकी पूजा हर शुभ कार्य की शुरुआत में की जाती है। इन पंचदेवों में भगवान गणेश, भगवान शिव, भगवान विष्णु, माता दुर्गा और सूर्य देव शामिल हैं। इनमें सूर्य देव एकमात्र ऐसे देवता हैं, जिन्हें प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। ज्योतिष में सूर्य को नौ ग्रहों का राजा माना गया है। इस ग्रह की पूजा से कुंडली के कई दोष शांत हो सकते हैं। आज गुड़ का करें दान कुंडली में सूर्य की स्थिति का असर अन्य ग्रहों पर भी होता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर हो, तो व्यक्ति को आसानी से सफलता नहीं मिल पाती है। ऐसी स्थिति में नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। विशेष रूप से रविवार को पूजा-अर्चना करने के बाद तांबा, गुड़, लाल वस्त्र जैसी चीजों का दान करना चाहिए। अभी गर्मी का समय है, तो किसी सार्वजनिक जगह पर प्याऊ लगा सकते हैं। ये संभव न हो, तो किसी प्याऊ में मटके का दान करें। सूर्य को अर्घ्य देने की विधि बहुत सरल है। इसके लिए तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें और उसमें लाल फूल तथा अक्षत (चावल) डालें। फिर उगते सूर्य की ओर मुख करके यह जल अर्पित करें। अर्घ्य देते समय ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जप करना चाहिए। यह उपाय न केवल आध्यात्मिक उन्नति देता है, बल्कि स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचाता है। ऐसे कर सकते हैं चतुर्थी व्रत चतुर्थी व्रत करने वाले व्यक्ति को सुबह स्नान के बाद भगवान गणेश के सामने व्रत और पूजा करने का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प के बाद गणेश जी का अभिषेक जल से करें, फिर पंचामृत से स्नान कराएं और अंत में पुनः स्वच्छ जल से अभिषेक करें। इसके बाद भगवान वस्त्र अर्पित करें और फूलों की माला से उनका श्रृंगार करें। गणेश जी को विशेष रूप से बूंदी के लड्डू अर्पित करना चाहिए। केले, सेवफल भी चढ़ाएं। साथ ही दूर्वा (घास) की 21 गांठ चढ़ाएं। पूजा में धूप और दीप जलाएं और ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जप करें। एक बात का विशेष ध्यान रखें कि गणेश जी की पूजा में तुलसी का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि शास्त्रों में इसे वर्जित माना गया है। पूजन के बाद पूरे दिन अन्न न खाएं। यदि पूर्ण उपवास करना संभव न हो, तो फल, दूध या अन्य फलाहार लिया जा सकता है। शाम को चंद्रमा के उदय के बाद भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा करें। इसके बाद व्रत का पारण कर भोजन करना चाहिए। शिव जी का भी करें अभिषेक गणेश जी के साथ ही भगवान शिव और माता दुर्गा का भी अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है। इनके अभिषेक के लिए ठंडे जल का इस्तेमाल करें। इसके बाद उन्हें वस्त्र और फूल अर्पित करें। शिव जी को बिल्व पत्र, धतूरा, आक के फूल आदि अर्पित करें, जबकि देवी दुर्गा को सुहाग सामग्री चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा में धूप-दीप जलाकर आरती करें और मिठाई का भोग लगाएं। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। हाथी को केले और गन्ना खिलाना शुभ माना गया है। साथ ही किसी गोशाला में गायों के लिए हरी घास या धन का दान करना भी पुण्यदायक होता है।

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