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राजस्थान सरकारी तंत्र में वेतन भुगतान को लेकर बड़ी अनियमितताएं सामने आई है, जिसमें सरकारी खजाने को 150 करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लगी। अनियमितताएं ऐसी कि विभाग की ओर से प्रदेश में सेवानिवृत्त और मृत कर्मचारियों के खातों में भी लगातार वेतन भेजा जाता रहा, लेकिन जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इतना ही नहीं, बड़ी संख्या में कर्मचारियों को तय नियमों से ज्यादा वेतन भी दिया गया। महालेखाकार कार्यालय द्वारा एआई मॉड्यूल आधारित विकसित आईएफएमएस सिस्टम ने गत माह फरवरी में इसका खुलासा किया है। जांच में पाया गया कि कर्मचारियों को मूल वेतन, महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ता तक तय दरों से अधिक दिए गए। एचआरए जहां 8% से 27% तक निर्धारित है, वहीं कई मामलों में 9% से लेकर 64% तक भुगतान कर दिया गया। इसी तरह डीए की दर 7% से 50% तक निर्धारित होने के बावजूद 8% से लेकर 2027% तक भुगतान किया गया है। इसी प्रकार अन्य भत्तों और भुगतान में भी भारी लापरवाही की गई है। वहीं, वेतन से होने वाली अनिवार्य कटौतियां जैसे सामान्य भविष्य निधि, राज्य बीमा और राजस्थान सरकारी स्वास्थ्य योजना भी निर्धारित दर से कम की गईं,जिससे सरकारी खजाने को और नुकसान हुआ। इस गड़बड़ी की जद में प्रदेश के 8 लाख कार्मिकों में से 1.77 लाख से अधिक केस सामने आए हैं। अब राज्य सरकार ने कर्मचारियों व अधिकारियों से करीब 150 करोड़ रुपये की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भरतपुर में करीब 5 करोड़ रुपये की वसूली की जा रही है। गड़बड़ी मुख्यतः डीडीओ स्तर पर हुई, क्योंकि एफएमएस-2 सिस्टम में उन्हें भत्ते दर्ज करने का अधिकार था, जिससे छेड़छाड़ संभव हुई। विभाग ने किसी एक अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया, क्योंकि हजारों डीडीओ इसमें शामिल थे, जिनमें कई सेवानिवृत्त या स्थानांतरित हो चुके हैं। इन 3 केसों से समझिए कैसे सेवानिवृत्ति व मृत्यु के बाद हुआ भुगतान 1. एचआरए में निर्धारित दर से 8 गुना भुगतान
भरतपुर के हेड कांस्टेबल जगदीश प्रसाद का मूल वेतन वर्ष 2020 में 50,800 रुपये था। उस समय एचआरए दर 8 प्रतिशत यानी 4,064 बनता है, लेकिन 2020 में ही फरवरी महीने की वास्तविक भुगतान 64 प्रतिशत के हिसाब से 32,512 रुपये दिया गया। इस तरह 28,448 रुपये का अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया। वेतन भुगतान बिल नंबर 27778026 के माध्यम से किया गया। डीडीओ पुलिस अधीक्षक कार्यालय,भरतपुर की ओर से भुगतान किया गया है। 2. मृत्यु के बाद भी वेतन का होता रहा भुगतान
चितौडग़ढ़ सीएमएचओ कार्यालय के सहायक प्रशासनिक अधिकारी सुरेश चंद्र शर्मा की जन्मतिथि 2 अप्रैल 1968 है। उनकी मृत्यु 1 जनवरी 2020 को हो गई। इसके बाद भी 1 अप्रैल 2020 को 67,375 रुपये ग्रॉस भुगतान किया गया। इस तरह अप्रैल 2020 से लेकर जनवरी 2021 तक लगातार 10 महीने तक वेतन का भुगतान किया गया। अप्रैल माह का भुगतान बिल नंबर 28597414 के माध्यम से किया गया। संबंधित डीडीओ सीएमएचओ कार्यालय, चितौडग़ढ़ है। 3. कोटा: सेवानिवृत्ति के बाद भी मिला भुगतान
कोटा के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रनोदिया की प्रधानाचार्य मुनमुन बनर्जी की जन्मतिथि 10 दिसंबर 1961 है। वे 31 दिसंबर 2021 को सेवानिवृत्त हो गईं। इसके बावजूद अप्रैल 2022 में 1,80,015 रुपये का ग्रॉस भुगतान कर दिया गया। इतना ही नहीं जब इनके खाते में भुगतान हुआ तो संबंधित अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद इस पर रोक नहीं लगाई गई। डीडीओ के माध्यम से बिल बनाकर ट्रेजरी को भेज दिया गया और भुगतान होता रहा। “महालेखाकार कार्यालय जयपुर से कर्मचारियों की रिकवरी सूची प्राप्त हुई है। इसके आधार पर जिले के संबंधित डीडीओ को पत्र लिखकर संबंधित कर्मचारियों से वसूली की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। जिन मामलों में रिकवरी बन रही है, वहाँ वसूली कराई जा रही है।”
-लोकेंद्र सिंह, जिला कोषाधिकारी, भरतपुर
विभागीय तंत्र की गड़बड़ी:मृत और रिटायर्ड कार्मिकों को भी दे दिया वेतन; 6 साल में 150 करोड़ रुपए ज्यादा बांट दिए, एआई ने पकड़ा
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