Sriganganagar Pakistan Drone Smuggling Racket Busted

Actionpunjab
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श्रीगंगानगर में पकड़े गए इंटरनेशनल हथियार और ड्रग तस्करों का पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया है। दोनों तस्कर बॉर्डर पार बैठे हैंडलर अहमद के संपर्क में थे।

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अहमद बेहद शातिर है और हाईटेक तरीके से तस्करी को अंजाम देता था। जांच में सामने आया है कि एंटी-ड्रोन सिस्टम की रडार से बचने के लिए सैटेलाइट ड्रोन के जरिए पूरी खेप भारतीय सीमा में गिराई जाती थी।

पैकेट के ऊपर सिल्वर रंग की कोटिंग की जाती थी, जिससे वह अंधेरे में भी चमकता रहे। अहमद रिसीवर को पैकेट की सैटेलाइट लोकेशन भी भेजता था।

1 मई की रात को पैकेट गिराया गया था, जिसमें 10 करोड़ रुपए की हेरोइन-अफीम और हथियार थे। 4 मई की सुबह तस्कर इसे कार में रखकर पंजाब ले जा रहे थे। इसी दौरान समेजा कोठी थाना पुलिस ने फिल्मी स्टाइल में दोनों को धर दबोचा।

8वीं पास तस्करों ने पुलिस के सामने और क्या बड़े खुलासे किए हैं? पढ़िए इस रिपोर्ट में

जेल से जुड़ा पाकिस्तान कनेक्शन, वहीं बना तस्करी का रास्ता

मुख्य आरोपी कुलविंदर सिंह पुत्र करनैल सिंह (27) महात्मा नगर, फाजिल्का (पंजाब) का रहने वाला है। दूसरा आरोपी रोबिन सिंह (23) भी महात्मा नगर, फाजिल्का (पंजाब) का ही रहने वाला है।

दोनों पिछले कुछ समय से इस तस्करी नेटवर्क में सक्रिय थे। कुलविंदर पहले भी पंजाब में एक मामले में जेल जा चुका है और वहीं से उसका संपर्क पाकिस्तान में बैठे हैंडलर से हुआ था। जेल से बाहर आने के बाद उसने अपने दोस्त रोबिन को भी इस नेटवर्क से जोड़ लिया।

अहमद ड्रग्स और हथियारों की डिलीवरी का पूरा प्लान बताता था। कहां से माल उठाना है, कितनी मात्रा होगी और आगे कहां सप्लाई करनी है, यह सारी जानकारी अहमद ही देता था।

सैटेलाइट ड्रोन का इस्तेमाल, एंटी-ड्रोन सिस्टम भी फेल

इस कार्रवाई में सबसे बड़ा खुलासा ये हुआ है कि तस्करी के लिए GPS आधारित ड्रोन की बजाय सैटेलाइट ड्रोन का इस्तेमाल होता था। यह बॉर्डर पर लगे एंटी-ड्रोन सिस्टम की पकड़ में नहीं आता।

आमतौर पर सुरक्षा एजेंसियां GPS सिग्नल के आधार पर ड्रोन की पहचान करती हैं। लेकिन सेटेलाइट ड्रोन कई बार चकमा दे देता है। जानकारी के मुताबिक, इस तरह के ड्रोन एक बार में करीब डेढ़ से ढाई किलो तक का वजन पहुंचा सकते हैं।

तस्करों की कार 120 की स्पीड में थी, जो नाकाबंदी के दौरान ट्रेक्टर ट्रॉली से जा टकराई।

तस्करों की कार 120 की स्पीड में थी, जो नाकाबंदी के दौरान ट्रेक्टर ट्रॉली से जा टकराई।

टक्कर के बाद आरोपी इधर-उधर खेतों की तरफ दौड़ने लगे। तभी पीछा कर पकड़ा गया।

टक्कर के बाद आरोपी इधर-उधर खेतों की तरफ दौड़ने लगे। तभी पीछा कर पकड़ा गया।

सिल्वर चिप और चमकदार पैकिंग से होती है पहचान

ड्रोन से गिराए जाने वाले सामान में एक खास तरह की सिल्वर चिप लगाई जाती है। जब ड्रोन तय लोकेशन पर पहुंचता है तो पाकिस्तान में बैठा ऑपरेटर रिमोट के जरिए एक बटन दबाकर इस चिप को एक्टिवेट करता है।

जिससे पैकेट जमीन पर गिर जाता है। इसके अलावा, पैकेट के ऊपर सिल्वर रंग की कोटिंग की जाती है, जिससे वह अंधेरे में भी चमकता है और उसे रिसीवर आसानी से पहचान सके।

तस्करी को हाईटेक तरीके से अंजाम दिया जाता है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को इसकी भनक नहीं लग पाए।

पहली नाकाबंदी तोड़ी, बोलेरो को मारी टक्कर

समेजा कोठी थाना पुलिस ने बताया कि मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि पाकिस्तान से ड्रग्स और हथियारों की खेप शहर में सप्लाई होने वाली है। सूचना मिलते ही पुलिस ने सलेमपुरा गांव के पास बाजूवाला रोड पर नाकाबंदी कर दी।

4 मई की सुबह करीब 11 बजे तस्करों की कार (KIA सोनेट) वहां पहुंची। रुकने का इशारा किया तो तस्करों ने नाकाबंदी तोड़ दी। इतना ही नहीं, मौके पर खड़ी ASI की बोलेरो गाड़ी को भी टक्कर मार दी और तेज रफ्तार से फरार हो गए।

आरोपियों के पास से जब्त हथियार और ड्रग्स की खेप।

आरोपियों के पास से जब्त हथियार और ड्रग्स की खेप।

10 किमी आगे ट्रैक्टर-ट्रॉली से रोका रास्ता

एसएचओ कृष्ण कुमार ने तुरंत करीब 10 किलोमीटर आगे 75 एनपी मोड़ पर स्थानीय लोगों की मदद से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को आड़ा-तिरछा खड़ा कर सड़क को पूरी तरह ब्लॉक करवा दिया।

दोपहर करीब 2 बजे अनूपगढ़ की तरफ से आ रही सफेद कार जैसे ही इस ब्लॉकिंग पॉइंट पर पहुंची, तस्करों ने ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन तेज रफ्तार के कारण कार सीधे ट्रॉली में जा घुसी।

हादसे के तुरंत बाद दोनों आरोपी अलग-अलग दिशाओं में भागने लगे। इसी दौरान पुलिस और ग्रामीणों ने पीछा कर उन्हें खेतों से पकड़ लिया।

चाइना मेड हाईटेक पिस्टल, हेरोइन और अफीम की खेप

पुलिस ने आरोपियों की कार की तलाशी ली तो उसमें से भारी मात्रा में हेरोइन और अफीम बरामद हुई। इसके साथ ही विदेशी पिस्टल भी मिलीं, जिन पर ‘मेड इन ‘चाइना’ और ‘पाकिस्तान’ की मुहर लगी हुई थी।

दावा है कि पहली बार है जब हेरोइन के साथ-साथ अफीम भी इसी तरह ड्रोन के जरिए गिराई गई है। बरामद सामान की कुल कीमत करीब 10 करोड़ रुपए है।

आशंका है कि यह खेप चार दिन पहले ही भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन के जरिए गिराई गई थी और आरोपी इसे लेने के लिए यहां पहुंचे थे।

एसएचओ ने बताया- बार्डर पार से पहली बार अफीम की सप्लाई पकड़ी गई है और यह अफीम सामान्य से अलग भी नजर आ रही है।

दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। साथ ही उनके आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।

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