गरीब और जरूरतमंद लोगों को 8 रुपए में भोजन उपलब्ध कराने वाली अन्नपूर्णा रसोई योजना में AI की मदद से फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है।
.
जांच में खुलासा हुआ कि अन्नपूर्णा रसोई संचालक पुराने लाभार्थियों की फोटो में बदलाव कर उन्हें नया बताकर पोर्टल पर अपलोड कर रहे थे। इसके बाद उन्हीं के आधार पर फर्जी कूपन जनरेट कर रहे थे।
मामले में 4 अन्नपूर्णा रसोइयों को सीज किया गया है और प्रत्येक पर 1-1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। अब जिले की सभी 38 रसोइयों के पिछले 5 महीने के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। हालांकि पकड़े गए संचालकों का दावा है कि कच्ची बस्तियों के लोगों के पास कपड़े कम होते हैं, ऐसे में उनकी फोटो एक ही दिखाई दे रही है।

झुंझुनू में संचालित अन्नपूर्णा रसोई (फाइल फोटो)
कैसे करते थे यह खेल, AI से फोटो बदलकर बनाए जा रहे थे नए लाभार्थी
भ्रष्टाचार के इस डिजिटल मॉडल को समझने के लिए शुक्रवार को दैनिक भास्कर टीम ने जब आईटी एक्सपर्ट्स और जानकारों से बात की, तो जांच में सामने आया कि कुछ अन्नपूर्णा रसोई संचालक पुराने लाभार्थियों की फोटो को AI टूल की मदद से बदल रहे थे। फोटो में चेहरा, बैकग्राउंड, पिक्सल और कपड़ों के रंग में मामूली बदलाव कर उसे नए लाभार्थी की तरह पोर्टल पर अपलोड किया जाता था।
इसके बाद एक ही व्यक्ति की फोटो का अलग-अलग तारीखों में उपयोग कर कई कूपन जनरेट किए जा रहे थे। मौके पर कम लोग भोजन कर रहे थे, लेकिन रिकॉर्ड में ज्यादा भोजन परोसा हुआ दिखाया जा रहा था।

डायरेक्टर अनिता कुमारी फर्जीवाड़े की जानकारी देते हुए।
ऐसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
अनिता कुमारी, जॉइंट डायरेक्टर ऑफ टेक्नोलॉजी एंड कम्युनिकेशन, आईटी सेल विभाग ने बताया- डीएलबी की आईटी टीम ने ऑनलाइन कूपन डेटा और लाभार्थियों की फोटो की जांच की। जांच में कई फोटो में एक जैसे चेहरे, कपड़े और पैटर्न बार-बार दिखाई दिए।
कुछ रसोइयों में रिकॉर्ड के अनुसार रोज 190 से 200 कूपन कट रहे थे, जबकि मौके पर केवल 19 से 20 लोग ही भोजन करते मिले। डेटा, फोटो और मौके की स्थिति का मिलान करने पर गड़बड़ी सामने आ गई।
इसके बाद 4 रसोइयों को सीज कर प्रत्येक पर 1-1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया।

योजना के तहत 8 रुपए में पौष्टिक थाली उपलब्ध कराई जाती है।
जरूरतमंदों को सस्ता भोजन देना था उद्देश्य
सरकार ने गरीब, मजदूर, प्रवासी और जरूरतमंद लोगों को सस्ते में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए अन्नपूर्णा रसोई योजना शुरू की थी। योजना का उद्देश्य था कि कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोए।
योजना के तहत 8 रुपए में 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जी, 300 ग्राम चपाती और 100 ग्राम चावल या मिलेट्स की खिचड़ी उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए सरकार संचालकों को अनुदान भी देती है।
वेरिफिकेशन सिस्टम में AI से किया घोटाला
जानकारी के अनुसार सरकारी पोर्टल का वेरिफिकेशन सिस्टम चेहरे के मुख्य फीचर्स को पहचानता है। आरोप है कि AI की मदद से फोटो के पिक्सल, कपड़ों के रंग और बैकग्राउंड में बदलाव कर सिस्टम को भ्रमित किया गया।
इस तरीके से एक ही व्यक्ति को अलग-अलग लाभार्थी दिखाकर फर्जी कूपन बनाए गए।

नोडल अधिकारी अरुण कुमार जाखड़ ने पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी दी।
एक जैसे कपड़ों पर संचालक बोले-
आईटी टीम की जांच में कई लाभार्थी लगातार एक जैसे कपड़ों में दिखाई दिए। कई महीनों तक एक जैसे कपड़ों वाली फोटो सामने आने पर संचालकों से जवाब मांगा गया।
इस पर संचालकों ने कहा कि कच्ची बस्तियों के लोगों के पास कपड़े कम होते हैं, इसलिए वे रोज एक जैसे कपड़े पहनकर भोजन करने आते हैं।
मामला सामने आने के बाद स्वायत्त शासन विभाग (DLB) और स्थानीय प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
जिले की सभी 38 अन्नपूर्णा रसोइयों के 1 जनवरी 2026 से 31 मई 2026 तक के ऑनलाइन कूपन डेटा, आवंटन और उपयोग रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
कई जगह भोजन और कूपन के आंकड़ों में अंतर
जांच में यह भी सामने आया कि असली काउंटर पर भले ही कम लोग भोजन कर रहे थे, लेकिन बैकएंड में कंप्यूटर ऑपरेटर AI से तैयार फोटो के जरिए लगातार कूपन जनरेट कर रहे थे।
कई जगह 20 लोगों के आने के बावजूद रिकॉर्ड में 190 से 200 कूपन तक काटे जाने का मामला सामने आया। जांच में भोजन क्षमता और उपयोग के आंकड़ों में भी अंतर मिला है।
मंड्रेला की एक रसोई की कुल क्षमता 57,800 भोजन की थी, जबकि रिकॉर्ड में 36,986 भोजन दर्ज किए गए। उपयोग प्रतिशत 63.99 रहा।
झुंझुनूं शहर की 6 रसोइयों में कुल क्षमता 58,200 भोजन की थी, जबकि रिकॉर्ड में 42,661 भोजन दर्ज किए गए। यहां उपयोग प्रतिशत 73.30 रहा।
मुकुंदगढ़ की 2 रसोइयों में 72.12 प्रतिशत और मंडावा की 2 रसोइयों में 86 प्रतिशत उपयोग दर्ज किया गया।
बिसाऊ में सबसे ज्यादा गड़बड़ी का शक
बिसाऊ की 2 रसोइयों में रिकॉर्ड के अनुसार 44,606 भोजन और 74.59 प्रतिशत उपयोग दर्ज किया गया।
लेकिन मौके की जांच में सामने आया कि वहां रोजाना केवल 19 से 20 लोग भोजन कर रहे थे, जबकि 190 से 195 कूपन प्रतिदिन काटे जा रहे थे। इससे रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर सामने आया।
वहीं सुल्ताना में 95.51 प्रतिशत और सिंघाना में 95.19 प्रतिशत उपयोग दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों की भी दोबारा जांच की जा रही है।
सुलताना और सिंघाना में 95% से ज्यादा उपयोग
रिकॉर्ड के मुताबिक सुलताना में 95.51% और सिंघाना में 95.19% उपयोग दर्ज किया गया है। ये आंकड़े 100% के काफी करीब हैं। इसलिए इन रसोइयों के रिकॉर्ड की भी AI टूल की मदद से दोबारा जांच की जा रही है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ये आंकड़े सही हैं या फिर कूपन बढ़ाकर दिखाए गए हैं।
गड़बड़ी मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई
नोडल अधिकारी अरुण जाखड़ ने बताया कि जिले में वर्तमान में 38 रसोइयां संचालित हैं।
उन्होंने कहा कि जिन 4 रसोइयों पर कार्रवाई हुई है, उनसे जुर्माने की राशि बकाया बिलों से वसूल की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि बाकी 34 रसोइयों के रिकॉर्ड की भी जांच चल रही है। यदि किसी संस्था द्वारा कूपन बढ़ाने या AI के जरिए पुरानी फोटो का उपयोग कर फर्जी लाभार्थी बनाने की पुष्टि होती है तो उसे ब्लैकलिस्ट कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
————————-
यह खबर भी पढ़ें…
अन्नपूर्णा रसोई में फर्जीवाड़ा, तीन संस्थाएं ब्लैकलिस्ट:झुंझुनूं, चिड़ावा और पिलानी में ‘फोटो से फोटो’ खींचकर काटे जा रहे थे नकली कूपन

कोई भी भूखा न सोए उद्देश्य के साथ सरकार ने ‘श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना’ चलाई थी। इसमे गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए यहां सिर्फ 8 रुपए में भर पेट खाना खिलाया जाता है। (पूरी खबर पढ़ें)