The 2450 MW solar plant in Poogal will be equipped with 1600 MW batteries, providing electricity even after sunset.

Actionpunjab
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जिले के पूगल में देश के सबसे बड़े 2450 मेगावाट सोलर प्लांट में अब 1600 मेगावाट/6,400 मेगावाट-घंटा की भारी-भरकम बैटरी स्टोरेज प्रणाली लगेगी। इसके लिए अलग से प्लेट्स नहीं लगानी पड़ेंगी। राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (आरईआरसी) ने नियमों में बदलाव को मं

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अब सूरज ढलने के बाद शाम को जब बिजली की मांग ज्यादा होती है, तब ये बैटरियां ग्रिड को बिना रुकावट सप्लाई करेंगी। इससे शाम की कटौती से निजात मिलेगी। अभी सायंकाल के बाद थर्मल या गैस प्लांट से महंगी बिजली लेनी पड़ती है। अब कंपनियों की परफॉर्मेंस सालभर की कुल बिजली के बजाय शाम के संकट में दी गई सप्लाई से तय होगी। प्रदर्शन कमजोर रहने पर 6 महीने में सुधार का मौका मिलेगा।

3 अगस्त को बंद होगी निविदा- राजस्थान की क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) में इसे एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ ग्रिड मजबूत होगा बल्कि बिजली की बर्बादी भी रुकेगी। 2,450 मेगावाट सोलर और भारत के सबसे बड़े बैटरी पार्क के लिए जारी टेंडर की प्रक्रिया 3 अगस्त को बंद होने जा रही है। इस मेगा प्रोजेक्ट में देश-विदेश की बड़ी बिजली कंपनियों के भाग लेने की उम्मीद जताई जा रही है।

2028 में पूरा होगा प्रोजेक्ट- पूगल में 2450 मेगावाट सोलर प्लांट और 1600 मेगावाट बैटरी लगाने का काम वर्ष, 28 तक पूरा होगा। पहले मार्च, 27 में पूरा होना था। कंपनियां अपनी सप्लाई की गारंटी को पूरा करने के लिए खुले बाजार (ग्रीन मार्केट) से अधिकतम 5% तक बिजली खरीद सकेंगी। इस बिजली का इस्तेमाल सीधे सप्लाई करने या अपनी बैटरियों को चार्ज करने के लिए किया जा सकेगा।

इसे यूं समझिए – देश के सबसे बड़े सोलर पार्क में 10 प्लांट लगेंगे। इनमें से 8 प्लांट 250-250 मेगावाट के और दो प्लांट 125-125 मेगावाट के होंगे। इसी तरह इन 10 प्लांट में अलग-अलग बैटरियां लगेंगी जो कुल 1600 मेगावाट की होंगी। दिन में यह बैटरियां सौर ऊर्जा से बिजली स्टोर करेंगी और शाम के बाद उस बिजली का इस्तेमाल किया जा सकेगा। पूरी 1600 मेगावाट बिजली इस्तेमाल करने पर चार से 5 घंटे बिजली मिलेगी। इससे कम बिजली इस्तेमाल होती है तो रातभर भी सप्लाई मिल सकती है।

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पूगल में सबसे बड़े सोलर प्लांट में बैटरियां लगाने की मंजूरी मिलना महत्वपूर्ण कदम है। अब तक बीकानेर में कुछ कंपनियों ने प्रयोगिक तौर पर दो से पांच मेगावाट तक की बैटरियां लगाई थी। लेकिन, 1600 मेगावाट की बैटरियां लगने से सायंकाल बाद बिजली सप्लाई की जा सकेगी जिससे आमजन को बड़ी राहत मिलेगी।

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– मानसिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर

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