दानिश, हापुड़।कुछ ही क्षण पहले
- कॉपी लिंक

हापुड़ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों को शिक्षा का अधिकार मिलने में बड़ी बाधाएं सामने आई हैं। जिले में चार चरणों में कुल 1767 बच्चों का चयन हुआ। इनमें से केवल 1047 बच्चों को ही विभाग द्वारा फाइनल पत्र दिया गया है।
स्थिति यह है कि फाइनल पत्र मिलने के बाद भी 60 प्रतिशत से अधिक बच्चे अभी तक प्रवेश के लिए स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं। 720 चयनित बच्चों को तो अभी तक स्कूल ही आवंटित नहीं किए गए हैं। एक अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। योजना में कई खामियां सामने आई हैं। एक तिहाई आवेदनों में किरायानामा लगाया गया है।
कुछ परिवारों में एक ही पिता की तीन संतानों को प्रवेश मिला है। कोठी में रहने वाले लोगों ने भी किरायानामा दिखाकर नामचीन स्कूलों में सीटें हासिल कर ली हैं। मलिन बस्तियों और घुमंतू समाज के लोगों को तो आरटीई की जानकारी ही नहीं है। मेरठ रोड और गढ़ रोड पर रहने वाले घुमंतू समाज के प्रतिनिधि कपिल और सितारा का कहना है कि वे अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन महंगी फीस के कारण नाम कट जाता है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी रितु तोमर का कहना है कि आरटीई में चयनित बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नियमानुसार आवेदनों का सत्यापन किया गया है और सभी चरणों की प्रवेश प्रक्रिया का प्रचार-प्रसार भी कराया गया है।