Kailash Mansarovar Yatra Flag Off

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लिपुपास दर्रा जहां से गुजरेगी कैलाश मानसरोवर यात्रा, इनसेट में सीएम धामी की फाइल फोटो।

6 साल बाद उत्तराखंड के लिपुलेख से शुरू हो रही कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला दल 4 जुलाई को दिल्ली से रवाना होगा। 50 श्रद्धालुओं का यह दल उसी दिन टनकपुर पहुंचेगा। अगले दिन 5 जुलाई की सुबह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी टनकपुर से यात्रियों को हरी झंडी दिख

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पिथौरागढ़ में दोपहर के भोजन के बाद यात्री धारचूला पहुंचेंगे। यहां उनका ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक छलिया नृत्य के साथ स्वागत किया जाएगा। कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) और जिला प्रशासन ने भोजन, आवास, सुरक्षा और स्वास्थ्य समेत सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

इस वर्ष लिपुलेख मार्ग से 10 दलों में कुल 500 श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर यात्रा करेंगे। प्रत्येक दल में 50 यात्री होंगे। भारत और चीन की ओर सड़क बनने के बाद अब यात्रियों को सिर्फ करीब 38 किलोमीटर ट्रेक करना होगा, जबकि पहले 60 किलोमीटर से अधिक पैदल चलना पड़ता था।

धारचूला में मिलेगा पहाड़ का स्वाद, डिनर में झंगोरे की खीर

केएमवीएन के धारचूला टीआरसी प्रबंधक धन सिंह बिष्ट ने बताया कि यात्रियों के स्वागत की विशेष तैयारी की गई है। डिनर में स्थानीय पहाड़ी व्यंजन झंगोरे की खीर परोसी जाएगी। अगले दिन नाश्ते में उपमा, पोहा, आलू के पराठे और पुदीने की चटनी रहेगी। स्वागत कार्यक्रम में स्थानीय कलाकार पारंपरिक छलिया नृत्य भी प्रस्तुत करेंगे।

यात्रा को देखते हुए सीमांत जिले में स्थित नाभीढांग में भी चहल-पहल तेज हो गई है।

यात्रा को देखते हुए सीमांत जिले में स्थित नाभीढांग में भी चहल-पहल तेज हो गई है।

गुंजी में होगी मेडिकल जांच, 10 जुलाई को चीन में प्रवेश

5 जुलाई की रात धारचूला में विश्राम के बाद 6 जुलाई को दल गुंजी पहुंचेगा। यहां सभी यात्रियों की अनिवार्य मेडिकल जांच होगी और ऊंचाई वाले क्षेत्र में बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी जाएगी। 7 जुलाई को भी दल गुंजी में रुकेगा। 8 जुलाई को नाभीढांग और 10 जुलाई को लिपुलेख दर्रे से होकर तिब्बत (चीन) में प्रवेश करेगा। 15 जुलाई को कैलाश पर्वत की परिक्रमा पूरी होने के बाद 18 जुलाई को पहला दल भारत लौटकर बूंदी पहुंचेगा।

लिपुलेख तक वाहन जाएंगे, सिर्फ 200 मीटर पैदल चलना होगा

धन सिंह बिष्ट के अनुसार यात्रियों को लिपुलेख दर्रे तक मैक्स, बोलेरो और कैंपर वाहनों से पहुंचाया जाएगा। वहां से करीब 200 मीटर पैदल चलने के बाद चीनी प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए वाहनों से आगे की यात्रा होगी। गुंजी और नाभीढांग में डॉक्टरों, ऑक्सीजन और जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी आईटीबीपी संभालेगी।

कुल दूरी और ट्रेक- अब कितना आसान हुआ सफर

इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा की कुल दूरी 1738 किलोमीटर होगी। इसमें लगभग 1690 किलोमीटर यात्रा वाहन से और सिर्फ 38 किलोमीटर पैदल ट्रेक रहेगा।

साल 2019 से पहले यात्रियों को धारचूला से लिपुलेख दर्रे तक 60 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलना पड़ता था। रास्ते में ऑक्सीजन की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यात्रा काफी चुनौतीपूर्ण होती थी।

अब भारत और चीन दोनों तरफ सड़क बनने के बाद यह यात्रा काफी आसान हो गई है। सीमावर्ती क्षेत्र तक वाहन पहुंचने लगे हैं, जिससे बुजुर्ग और पहली बार यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यह यात्रा पहले की तुलना में ज्यादा सुलभ हो गई है।

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